आपदा राहत को लेकर उठे शोर के बाद अब समाज कल्याण विभाग सूचना के अधिकार अधिनियम में फंसता नजर आ रहा है।
छात्रवृत्ति का एक मामला करीब 16 लाख रुपये के हेर फेर की ओर इशारा कर रहा है और राज्य सूचना आयोग ने इस मामले में तकनीकि विश्वविद्यालय को जांच का जिम्मा सौंप दिया है। आयोग ने संबंधित 41 छात्रों को दी गई छात्रवत्ति की पूरी रिपोर्ट तलब की है।
मामला वर्ष 2013-14 में रूड़की इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में बेचलर ऑफ लाइब्रेरी साईंस में पढ़ रहे 41 छात्रों का है। इनमें से प्रत्येक को समाज कल्याण विभाग हरिद्वार ने 38,750 रुपए की छात्रवृत्ति दी। हरिद्वार निवासी महबूब अंसारी ने इस मामले में सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी तो विभाग ने इसकी पुष्टि भी की।
हरिद्वार के समाज कल्याण विभाग के मुताबिक रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ मेडीकल साइंस में वर्ष 2013-14 में लाइब्रेरी सांइस के 41 छात्रों को छात्रवृत्ति तथा शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में 38,750/- रुपए हर छात्र को दिए गए।
लेकिन उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के लोक सूचना अधिकारी ने आवेदक को बताया कि वर्ष 2013-14 में इस कालेज के तीन छात्रों ने बीलिब की परीक्षा दी थी। इन तीनों के नाम उन 41 छात्रों की सूची में नहीं हैं जिन्होंने छात्रवृत्ति तथा शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि प्राप्त की।
तकनीकि विश्वविद्यालय के लोक सूचना अधिकारी के इस जवाब से महबूब अंसारी भी हैरान हैं और सूचना आयोग भी। राज्य सूचना आयुक्त प्रभात डबराल ने इस मामले की सुनवाई करते हुए लोक प्राधिकारी के रूप में तकनीकि विश्वविद्यालय को जांच के आदेश दिए है।
आयुक्त ने तकनीकि विश्वविद्यालय को समतुल्य लोक सूचना अधिकारी नामित करते हुए अगली सुनवाई तक विश्वविद्यालय से उन सभी छात्रों की सूची मांगी है जिन्हें 2013-14 में बीलिब के लिए उक्त संस्थान से पंजीकृत किया गया। इसके अलावा समाज कल्याण विभाग से 41 छात्रों की सूची से संबंधित सभी दस्तावेज मूल रूप में आयोग के सामने रखने का निर्देश दिया है।
साथ ही यह साक्ष्य भी मांगा है कि ये छात्र कब तक उक्त संस्थान में अध्ययनरत रहे और इनमें से किस-किस ने छात्रवृत्ति प्राप्त करने के बाद संबंधित परीक्षा दी। इस मामले में सुनवाई अब 27 जुलाई को होगी।