कांग्रेस के बागी विधायक भाजपा में शामिल तो हो गए हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव के टिकट वितरण में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की समीक्षा हावी रहेगी। संघ परिवार के घटक अपने स्तर से इन सभी बागी विधायकों के कार्यों की समीक्षा करेंगे। इसके बाद ही इनके टिकट का रास्ता साफ हो पाएगा। कुछ विधायकों का तो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ परिवार पहले से विरोध करता रहा है।
संघ समर्थक नेता बनेंगे मुश्किल
रायपुर विधायक उमेश शर्मा काऊ के भाजपा में शामिल होने के पहले विहिप ने उनका विरोध शुरू कर दिया था। इस संबंध में विहिप के प्रदेश महामंत्री महेंद्र प्रताप सिंह नेगी ने संघ की सर्किल में चर्चा की। काऊ के विरोध में नेगी ने यहां से उम्मीदवारी का दावा भी किया है।
जहां बागी विधायक टिकट मांगेंगे वहां संघ से निकले कई भाजपा नेता भी टिकट की मांग कर रहे हैं। इन्हें संघ का समर्थन प्राप्त है। संघ समर्थक नेताओं का टिकट काटना भाजपा हाईकमान के लिए मुश्किल होगा। संघ की सख्ती के अलावा भाजपा नेताओं में आपस में टूट-फूट शुरू हो जाएगी।
अगर भाजपा में टूटन हुई तो संघ सीधे हस्तक्षेप कर देगा। टिकट वितरण के पहले संघ अपने घटक संगठनों से उम्मीदवार के चरित्र और कार्यों के संबंध में रिपोर्ट मांगता है।