अजय टम्टा की मंत्रिमंडल में होते-होते रह गई एंट्री पहेली बनकर रह गई। कम ही लोगों को इस बात की खबर है कि तय होने के बाद टम्टा को मंत्रिमंडल में न लिए जाने की असली वजह क्या रही?
बताया जा रहा है कि संघ के कुछ बड़े नेता इस बात से नाखुश थे कि राज्य में तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों को किनारे कर एक अपेक्षाकृत कम अनुभवी नेता को केंद्र में मंत्री बनाया जाए। विस्तार के दिन तक यह बात केंद्रीय नेतृत्व ने भी समझ ली।
इसके अलावा, सूत्रों के मुताबिक बाबा रामदेव की ओर से रमेश पोखरियाल निशंक की जोरदार वकालत की गई। उधर, संघ के कुछ बड़े नेता भगत सिंह कोश्यारी के पक्ष में आ गए। पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता भी भगतदा के हिमायती बने। आखिर में समीकरण दुर्गम हो गए। इसी जद्दोजहद में उत्तराखंड मंत्रिमंडल में जगह पाने से वंचित रह गया।