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भटकी मोदी सरकार पर 'नकेल' कसने को तैयार RSS

Wed, 22 Jul 2015 04:30 PM IST
गिरीश रंजन तिवारी/ अमर उजाला, नैनीताल
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मोदी सरकार आरएसएस के एजेंडे से भटक गई है। जिस कारण अब संघ सरकार पर लगाम कसने की तैयारी में है।
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मोदी सरकार के 14 माह के कार्यकाल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के एजेंडे पर क्या कार्य हुआ इस पर सरस्वती विहार दुर्गापुर में बुधवार से होने वाली संघ की बैठक में मंथन किया जाएगा। संघ सरकार की नीतियां उसके एजेंडे से अलग होने से भी चिंतित है।

सरकार गठन से पहले ही श्रम सुधारों, भूमि अध्यादेश, कश्मीरी पंडितों की वापसी, एफडीआई इत्यादि पर संघ की अपनी अलग सोच रही है। संघ का जोर विदेशी के बजाय स्वदेशी पर, विदेशी निवेश को सीमित रखने और कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की ठोस कार्ययोजना पर रहा है।
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लेकिन सरकार संघ के इन एजेंडों पर काम नहीं कर पाई है। या यूं कहें संघ भाजपा सरकार की विभिन्न मसलों पर नीति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वयं संघी होने के कारण उनकी ताजपोशी में संघ की विशिष्ट भूमिका तो रही ही है, मोदी सरकार से संघ की अपेक्षाएं भी भारी भरकम हैं।

सूत्रों के मुताबिक सरकार के एजेंडे से भटकने को लेकर भी संघ चिंतित है और इन विषयों पर बुधवार से होने वाली बैठक में गंभीर चिंतन हो सकता है। बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, सर कार्यवाह भैया जी जोशी, सर सह कार्यवाह सुरेश सोनी, डा. कृष्ण गोपाल, दत्तात्रेय होशबोले सहित संघ के विभिन्न प्रांतों से जुड़े 41 प्रांत प्रचारक और वरिष्ठ नेता भाग ले रहे हैं।

बैठक में विहिप, बजरंग दल, दुर्गावाहिनी, किसान संघ, हिंदू जागरण मंच के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। बैठक में कश्मीर में बढ़ रहे आतंकवाद पर भी चर्चा होने की संभावनाएं हैं।
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संघ में राजनीति की दशा दिशा तय नहीं की जाती

संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डा. मनमोहन वैद्य ने कहा कि संघ में राजनीति की दशा और दिशा तय नहीं की जाती है। साफ कहा कि  बैठक में राजनीति के संबंध में कोई चर्चा नहीं होती है। डॉ. वैद्य पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती विहार दुर्गापुर में मंगलवार को हुई क्षेत्र प्रचारकों एवं संघ के अनुषांगिक संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक में तय हुए एजेंडे की ब्रीफिंग कर रहे थे।

उन्होंने बताया कि बैठक में आरएसएस की ओर से विभिन्न आयु वर्ग के लोगों को दी जा रही तालीम की समीक्षा की गई। इसके अलावा, संघ के विस्तार और अन्य गुणात्मक सुधारों के एजेंडे पर विमर्श किया गया। डॉ. वैद्य ने बताया कि संघ की वर्ष में तीन अहम बैठकें होती हैं।

इसमें संगठनात्मक कार्यों का लेखा-जोखा पेश कर व्यापक समीक्षा होती है। भविष्य के कार्यक्रमों पर चर्चा की जाती है। अन्य दो बैठकों में प्रस्ताव और निर्णय लिए जाते हैं। डॉ. वैद्य ने बताया कि प्रत्येक वर्ष अक्तूबर में अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक होती है। एक बैठक अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की होती है जो मार्च में नागपुर में हुई थी।

उन्होंने बताया कि गर्मियों की छुट्टियों में संघ की ओर से शिक्षा वर्ग आयोजित किए जाते हैं, जो 20 दिन के होते हैं। इस वर्ष ऐसे 70 शिक्षा वर्ग आयोजित किए गए। 13 से 40 आयु वर्ग के लिए आयोजित किए गए शिविर में बीते वर्ष 80 हजार युवाओं ने हिस्सा लिया।

इस वर्ष इसमें सवा लाख युवाओं ने हिस्सा लिया। यह शिक्षा वर्ग शाखा, मंडल व खंड स्तर पर चलाए जाते हैं। बैठक में इसकी भी समीक्षा कर भविष्य में इसे और बेहतर बनाने पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि इसके बाद संबंधित को शाखा चलाने का दायित्व दिया जाता है। यह दूसरे वर्ष में भी प्रवेश करते हैं।

डॉ. वैद्य ने बताया कि 40 से ऊपर के लोगों के लिए विशेष शिक्षा वर्ग आयोजित किया जाता है। इसमें भाग लेने वालों की संख्या 17 हजार से बढ़कर 19 हजार हो गई है। हर तीन साल में पाठ्यक्रम की समीक्षा भी की जाती है। उन्होंने कहा कि संघ जिला, विभाग स्तर के कार्यकर्ता और क्षेत्र स्तर के सीनियर कार्यकर्ताओं के कार्य और कार्यक्रमों की भी समीक्षा करता है।
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