मोदी सरकार आरएसएस के एजेंडे से भटक गई है। जिस कारण अब संघ सरकार पर लगाम कसने की तैयारी में है।
मोदी सरकार के 14 माह के कार्यकाल में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के एजेंडे पर क्या कार्य हुआ इस पर सरस्वती विहार दुर्गापुर में बुधवार से होने वाली संघ की बैठक में मंथन किया जाएगा। संघ सरकार की नीतियां उसके एजेंडे से अलग होने से भी चिंतित है।
सरकार गठन से पहले ही श्रम सुधारों, भूमि अध्यादेश, कश्मीरी पंडितों की वापसी, एफडीआई इत्यादि पर संघ की अपनी अलग सोच रही है। संघ का जोर विदेशी के बजाय स्वदेशी पर, विदेशी निवेश को सीमित रखने और कश्मीरी पंडितों की घर वापसी की ठोस कार्ययोजना पर रहा है।
लेकिन सरकार संघ के इन एजेंडों पर काम नहीं कर पाई है। या यूं कहें संघ भाजपा सरकार की विभिन्न मसलों पर नीति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वयं संघी होने के कारण उनकी ताजपोशी में संघ की विशिष्ट भूमिका तो रही ही है, मोदी सरकार से संघ की अपेक्षाएं भी भारी भरकम हैं।
सूत्रों के मुताबिक सरकार के एजेंडे से भटकने को लेकर भी संघ चिंतित है और इन विषयों पर बुधवार से होने वाली बैठक में गंभीर चिंतन हो सकता है। बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत, सर कार्यवाह भैया जी जोशी, सर सह कार्यवाह सुरेश सोनी, डा. कृष्ण गोपाल, दत्तात्रेय होशबोले सहित संघ के विभिन्न प्रांतों से जुड़े 41 प्रांत प्रचारक और वरिष्ठ नेता भाग ले रहे हैं।
बैठक में विहिप, बजरंग दल, दुर्गावाहिनी, किसान संघ, हिंदू जागरण मंच के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। बैठक में कश्मीर में बढ़ रहे आतंकवाद पर भी चर्चा होने की संभावनाएं हैं।