डीप लर्निंग बताती है कितनी भीड़ मिलेगी
तकनीक के अंतर्गत डीप लर्निंग से भीड़ का पता चलता है। इस प्रणाली में कैमरे से लिए गए वीडियो को आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस आधारित एल्गोरिद्म आदि के जरिए यात्रियों के प्रवेश और निकास का आकलन किया जाता है। यह अनुमान रियल टाइम में लगाया जाता है।
यात्रियों की संख्या और टिकट के अंतर को भी करेगी खत्म
ट्रांजिट आई से यह पता चलेगा कि एक रूट पर कितने यात्री बस में चढ़े और कितने उतरे। इससे यदि कडंक्टर ने टिकट कम काटे हैं तो उसका भी पता चलेगा, साथ ही रास्ते में चेकिंग के लिए खड़ी टीम के लिए यात्री और टिकट के बीच अंतर के आधार पर होने वाली राजस्व की चोरी का पता लगाना भी आसान हो जाएगा।
रियल टाइम ट्रैकिंग के साथ रिकार्डिंग भी
ट्रांजिट आई परिवहन विभाग को रियल टाइम में बसों की मूवमेंट जानने के लिए ट्रैकिंग सिस्टम के साथ ही 24 घंटे की रिकार्डिंग की सुविधा भी देगा। दिन के अंत में रिकार्डिंग सर्वर पर ऑटोमेटिक सेव हो जाएगी। ट्रैकिंग के लिए इसमें भारतीय क्षेत्रीय नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम नाविक का उपयोग किया गया है।
ये भी पढ़ें...Haldwani: तीन दिन से लापता लड़कियों को नहीं खोज पाई पुलिस...फूटा गुस्सा, कोतवाली से लेकर सड़क तक हंगामा
इसलिए पैदा हुई शोध की जरूरत
प्रो. अमित अग्रवाल ने बताया कि सार्वजनिक परिवहन में भीड़ एक बड़ा कारण है, जिसके चलते रोजमर्रा सड़क पर परिवहन करने वाले लोग प्राइवेट वाहनों को अपना रहे हैं। ऐसे में यात्रियों को उनकी यात्रा प्लान करने के लिए ट्रांजिट आई को तैयार करने की रूपरेखा बनाई गई है। ताकि सार्वजनिक वाहनों का अधिक से अधिक उपयोग हो सके।