रामपाल की 45 बीघा जमीन कान्हापुर, ब्रह्मपुर में एक बैंक्वेट हॉल है, जिसका करीब पांच लाख रुपये सालाना किराया आता है। साथ ही पांच दुकानों का भी किराया आता है। रामपाल प्लॉट भी बेचते हैं, लेकिन वह कमाई का हिस्सा अपने बेटे विपिन के बजाय भतीजों को देते थे।
इससे विपिन नाराज रहने लगा था। उसने अपने मामा मनोज निवासी ग्राम मछेरी, थाना दौराला मेरठ को जानकारी दी। मनोज ने गांव निवासी दोस्त गुरुविंद्र के साथ मिलकर जीजा को समझाने का प्रयास किया, लेकिन रामपाल ने हिस्सा देने से इनकार कर दिया। इस पर गुरुविंद्र राठी ने विपिन को संपत्ति के लिए पिता की हत्या करने की बात कही।
गुरुविंद्र ने मनोज और विपिन की मुलाकात अपने रिश्तेदार प्रमोद जाट निवासी धर्मवाला, विकासनगर से करवाई। हत्या के लिए दस लाख की बात तय हुई।
प्रमोद ने तीनों को बताया कि सिसौली, मुजफ्फरनगर में छोटा उसके घर पर नौकरी करता है। वह अच्छा शूटर है। प्रमोद ने बताया कि एक ट्रैक्टर मैकेनिक शहजाद निवासी नौगांव, थाना मिर्जापुर, सहारनपुर उसका परिचित है और वह इस काम के लिए बाइक देगा।
रुपयों का लालच देकर शहजाद को भी साजिश में शामिल कर लिया गया। 29 जनवरी की रात छोटा और उसका एक अन्य दोस्त रुड़की पहुंचे। यहां गुरुविंद्र ने उन्हें 15 बोर का तमंचा और कारतूस दिए। दोनों की गुरुविंद्र से व्हाट्सएप से बातचीत होती रही।
इसके बाद दोनों ने रामपाल को गोली मार दी और फरार हो गए। एसपी देहात ने बताया कि विपिन, शहजाद और प्रमोद जाट को गिरफ्तार कर लिया गया है। छोटा, गुरुविंद्र राठी और मनोज की तलाश की जा रही है। तीनों के पास से एक तमंचा, कारतूस और बाइक बरामद की गई है।
गोली मारने के बाद विपिन अपने पिता के साथ रुड़की अस्पताल में भी पहुंचा। यहां वह बार-बार रजत शर्मा का नाम लेता रहा। इतना ही नहीं देहरादून अस्पताल में भी वह बार-बार रजत शर्मा पर आरोप लगाता रहा।
उस पर किसी को शक न हो, इसलिए वह अस्पताल में अपने पिता के पास ही रहा और उनकी देखभाल में लगा रहा। पुलिस ने रजत के खिलाफ केस दर्ज कर पूछताछ की तो कुछ नहीं मिला।
पुलिस ने बारीकी से जांच की तो विपिन और उसके मामा का रामपाल से संपत्ति को लेकर विवाद की बात सामने आई। पुलिस ने विपिन को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की तो उसने पूरा राज खोल दिया।
रामपाल को बदमाशों ने दो गोली मारी थी। गर्दन से एक गोली रुड़की में डॉक्टरों ने निकाल दी थी जबकि एक गोली पीठ में फंसी रह गई थी। इसके लिए उन्हें देहरादून के अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां डॉक्टरों ने एमआरआई की तो गोली फंसी होने की जानकारी पुलिस व परिजनों को दी और ऑपरेशन करने की बात कही।
इसी बीच ऑपरेशन भी हो गया। पुलिस ने डॉक्टरों से गोली अपने कब्जे में लेने की बात कही तो वे कुछ जवाब नहीं दे पाए। तभी से पुलिस गोली की तलाश कर रही है, लेकिन डॉक्टरों से कोई जवाब नहीं बन रहा है। ऐसे में गोली कहां गई? यह जांच का विषय बना हुआ है।
पुलिस टीम में ये रहे शामिल
इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह, सीआईयू प्रभारी रविंद्र कुमार, एसएसआई प्रदीप कुमार, एसआई अंकुर शर्मा समेत देवेंद्र भारती, सचिन, विनोद चपराना, प्रवीण, रामवीर, लईक, महिपाल, रविंद्र खत्री, सुरेश रमोला, नितिन, जाकिर और नीरज। एसपी देहात ने बताया कि पुलिस टीम को एसएसपी की ओर से ढाई हजार रुपये के ईनाम की घोषणा की गई है।