रुड़की बम विस्फोट और अन्य संगीन अपराधों में पुलिस को खास इनपुट उपलब्ध कराने में नाकाम रहा खुफिया तंत्र सवालों के घेरे में है।
नाकाम साबित हो रहे मैदानी क्षेत्र में तैनात इंटेलीजेंस अधिकारियों और कर्मचारियों को अब सजा के तौर पर पहाड़ की राह दिखाई जा सकती है। साथ ही सूचनाओं के आधार पर ही अब खुफिया तंत्र के कामकाज की समीक्षा होगी।
इंटेलीजेंस की नाकामी का ही असर
रुड़की बम विस्फोट और हल्द्वानी में सीएम की सुरक्षा में चूक जैसे मामलों को लेकर इंटेलीजेंस निशाने पर है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दो दिन पहले हरिद्वार में होमगार्ड की यूनिट स्थापित करने की घोषणा कर चुके हैं। यह शायद इंटेलीजेंस की नाकामी का ही असर है।
इस यूनिट का काम सिर्फ अपराध, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और सांप्रदायिक लिहाज से खुफिया जानकारी जुटाना होगा। उधर, डीजीपी बीएस सिद्धू ने इंटेलीजेंस अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि निचले स्तर पर काम करने वाले खुफिया तंत्र के लोग रोजमर्रा के काम के साथ गंभीर मामलों में पुलिस मुख्यालय को गोपनीय रिपोर्ट उपलब्ध कराएंगे।
आईजी इंटेलीजेंस से दिसंबर और जनवरी माह में सूचनाओं के आधार पर काम की समीक्षा करने के लिए कहा गया है। नाकाम अधिकारियों और कर्मचारियों को दंडित किया जाएगा। साथ ही बेहतरीन कार्य के लिए पुरस्कृत भी किया जाएगा।
खुफिया इनपुट देने में नाकाम अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में मान लिया जाएगा कि वे मैदानी क्षेत्रों में काम करने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे लोगों को पहाड़ी इलाकोें में स्थानांतरित किया जाएगा।-बीएस सिद्दू, डीजीपी