मानसून ने खेती को जरूर उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में राहत दी हो पर सड़कों पर यह बरसात कहर बनकर टूटी हैं।
नुकसान वहां अधिक हैं जहां पिछली आपदा ने सड़कों की सूरत बिगाड़ कर रख दी थी। चारों धामों के यात्रा मार्ग विभिन्न स्थानों पर बंद हुए।
हाल ही में ब्लेक टॉप कर चमकाई गई सड़कें भी इस बार मानसून की अभी तक की बरसात को नहीं संभाल पाई। हाल यह तब है जबकि प्रदेश में अगस्त और सितंबर में भी बरसात होती रही है।
सामन्य से 11 प्रतिशत अधिक हुई बरसात
मौसम विभाग की हाइड्रोमेट डिवीजन के मुताबिक प्रदेश में 10 जुलाई से लेकर 16 जुलाई के बीच 111 मिमी बरसात हुई।
यह सामन्य से 11 प्रतिशत अधिक है। पर एक जुलाई से 16 जुलाई के बीच कुल मिलाकर 225 मिमी बरसात हुई जो सामान्य से 39 प्रतिशत कम है।
इसके बावजूद प्रदेश में बरसात ने सड़कों का बुरा हाल कर दिया है।
150 सड़कों पर भूस्खलन के कारण आया मलबा
स्टेट कंट्रोल रूम की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक 20 जुलाई को भी करीब 150 सड़कों पर भूस्खलन के कारण मलबा आया जिससे यातायात ठप हो गया।
चारों धामों की सड़क भी मलबा आने से बंद है। इन सड़कों को यात्रा शुरू होने से पहले सुधारा गया था। ऐसे में अब आगे आने वाले समय में भी इन सड़कों की सेहत शयद ही ठीक रह पाए।
प्रदेश में अगस्त और सितंबर में भी बरसात करा प्रकोप रहता आया है। जाहिर है कि चार धाम यात्रा पर संकट फिलहाल टला नही है।
ये सड़कें हैं बंद
- केदारनाथ हाइवे सिरोबगड़ में मलवा आने से बंद
- गंगोत्री हाइवे सुखीटॉप में मलवा आने से बंद
- बद्रीनाथ हाइवे लामबगड़ और सिरोबगड़ में मलवा आने से बंद
- पौड़ी गढ़वाल-60 ग्रामीण मोटर मार्ग बंद
- सहिया के नौ , देहरादून के दो और चकराता के पांच मोटर मार्ग बंद
- अल्मोड़ा-13 ग्रामीण मोटर मार्ग बंद
- नैनीताल में भुजान-गर्जिया, मल्ला-तल्ला-रामगढ़ मोटर मार्ग सहित 31 ग्रामीण मोटर मार्ग मलवा आने से बंद
- जसपुर-अफजलगढ़ नेशनल हाइवे बंद
- पिथौरागढ़-चंपावत हाइवे,पिथौरागढ़-अल्मोड़ा हाइवे,घाट-धारचूला मोटर मार्ग, तवाघाट-सोबला मोटर मार्ग मलवा आने से बंद
- चंपावत-नौ ग्रामीण मोटर मार्ग सहित पिथौरागढ़-टनकपुर हाइवे मलवा आने से बंद