प्रदेश की नौकरशाही का हाल भी ‘अजब-गजब’ है। हर साल शहर की सड़कों पर हजारों करोड़ खर्च करने वाले लोनिवि के निर्माण खंड देहरादून को अपनी ऑफिस एप्रोच वाली रोड के लिए वित्त विभाग ने फिजूलखर्ची समझकर बैरंग लौटा दिया। इस कार्यालय से विश्व बैंक को प्रेषित इस संबंध के प्रारंभिक आगणनों में एक ऑफिस एप्रोच रोड का भी प्रस्ताव था।
इस कार्यालय में कर्मचारियों और अधिकारियों की लंबी-चौड़ी फौज है। यहां प्रतिदिन कई ठेकेदार और आमजन अपने काम के लिए आते-जाते हैं। यह कार्यालय मुख्य हरिद्वार रोड बाईपास हाईवे से मात्र 100 मीटर दूर भी नहीं है, लेकिन यहां जो भी आता है हिचकोले खाकर ही जाता है। मुख्य हाईवे होने से क्रास करते वक्त कई बार हादसे भी हो चुके हैं। निर्माण खंड डिवीजन कार्यालय ने एक पत्रांक 4297/1सी दिनांक 20-12-2013 के माध्यम से अपने अधीक्षण अभियंता से गुजारिश की थी।
अधीक्षण अभियंता ने भी यह इस्टीमेट विभाग में वित्तीय अनुमति के लिए लगाया लेकिन वित्त विभाग की पैनी और पारखी नजर ने इस इस्टीमेट को जरूरी न समझते हुए रद्दी की टोकरी में डाल दिया। पीडब्लूडी के इंजीनियर सहित अधिकारी-कर्मचारी हैरान हैं। एक जेई ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि साहब हम तो वही कर सकते हैं जो वित्त विभाग पास कर देगा, अन्यथा हमारे हाथ-पांव बंधे हैं।
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कोट
कबाड़ी बाजार से होकर कार्यालय तक प्रस्तावित कच्ची एप्रोच रोड को पक्का करने के लिए पुन: प्रस्ताव शासन को प्रेषित किए जाएंगे। पूर्व में प्रस्ताव क्यों पास नहीं हुए मेरी समझ से भी परे है।
- अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड, लोक निर्माण विभाग देहरादून