मलिन बस्तियों पर राजनीति हमेशा से होती रही है। चूंकि चुनाव एक साल दूर हैं इसलिए मलिन बस्तीवासियों को मालिकाना हक देने के मामले पर राजनीतिक दलों में तलवारें खिंच गई हैं। मलिन बस्ती सुधार समिति की सिफारिशों को मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद इस मुद्दे पर उग्र राजनीति की शुरुआत हो गई है।
मलिन बस्ती सुधार समिति के अध्यक्ष विधायक राजकुमार की सिफारिशों पर मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा सहमति जताने पर कांग्रेसियों, विशेषकर जिनके विधानसभा क्षेत्र में मलिन बस्तियां अधिक हैं, में खुशी है। लाखों लोगों को मालिकाना हक अगर मिल जाएगा तो इसके चौंकाने वाले नतीजे सामने आएंगे।
26 फरवरी को धरने की तैयारी
एक साल पहले विधायक राजकुमार की अध्यक्षता में सरकार ने चार सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति की रिपोर्ट को मुख्यमंत्री ने स्वीकार कर लिया है। इससे कांग्रेसी आत्मविश्वास से लवरेज हैं तो भाजपा बैकफुट पर है।
हालांकि मेयर विनोद चमोली तीखे तेवर दिखा रहे हैं। उनका कहना है कि मलिन बस्तीवासियों के हक-हकूक को लेकर भाजपा पार्षद 26 फरवरी को सचिवालय गेट पर धरना देंगे। इसके बाद प्रदेशव्यापी आंदोलन करेंगे।
जनता को मूर्ख बन रही सरकार : चमोली
मलिन बस्तियों के नियमितीकरण पर हरीश रावत सरकार जनता को मूर्ख बना रही है। इस तरह की घोषणा एक बार पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और तीन बार मुख्यमंत्री हरीश रावत कर चुके हैं। अब तक यह मामला कैबिनेट में नहीं पहुंचा। इसके लिए दो-दो समितियां बना दी गई हैं। इनमें जबरदस्त अंतरविरोध है।
-मेयर, विनोद चमोली
बस्तीवासी सबक सिखाएंगे: राजकुमार
एक व्यक्ति हैं जिनका काम सिर्फ नकारात्मक ऊर्जा व विचार का फैलाव करना है। यह व्यक्ति खुद गैर जिम्मेदार है और दूसरे के सकारात्मक काम में दखल करता है। मैंने मेहनत व ईमानदारी से अपने काम को अंजाम दिया है। मुख्यमंत्री इस मामले बेहद गंभीर हैं। जल्द ही इस घोषणा को जमीन पर उतार दिया जाएगा। इससे गरीबों की आर्थिकी में इंकलाबी बदलाव आएगा। हमारी सोच स्पष्ट है इसलिए कार्यान्वयन में देरी नहीं होगी।
-विधायक व संसदीय सचिव राजकुमार