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52 साल बाद भारत और चीन को नजदीक लाएगी ये सड़क

Fri, 18 Apr 2014 09:49 AM IST
वीपी बमोला/ अमर उजाला, गौचर (चमोली)
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भारत-चीन युद्ध के 52 वर्षों बाद चीन-तिब्बत से सटी सीमा तक सड़कों के विकास की उम्मीद जागी है।
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बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) वायुसेना की मदद से सड़क निर्माण के लिए मशीनों को सीमांत क्षेत्रों में उतारने में जुटा है।

इससे सड़क निर्माण की गति में तेजी आएगी। हालांकि बीआरओ को प्रदेश सरकार से खनन संबंधी इजाजत का इंतजार है।

1966 तक मलारी में पहुंची सड़क

वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के समय सीमांत नीति-माणा क्षेत्र में सेना को अनाज और जरूरी वस्तुएं पहुंचाने में सड़कों की बदहाली आड़े आई थी।

सड़कों की जरूरत समझते हुए बीआरओ ने वर्ष 1963 से यहां सड़क निर्माण का काम शुरू भी किया। 1966 तक मलारी तक सड़क भी पहुंची। इसके बाद की सरकारों की प्राथमिकता बदल गई।

हाल यह है कि वर्ष 1966 से अब तक बदरीनाथ से माणा 3 किमी और मलारी से सुमना से 4 किमी पीछे तक करीब 25 किमी ही मोटर मार्ग निर्मित हो सका।

बाडाहोती सीमा पर बीते वर्ष चीन कर चुका घुसपैठ

48 वर्षों में चमोली जिले के सीमांत क्षेत्र में सिर्फ 28 किमी सड़कों का निर्माण हुआ। जबकि चीन अरुणाचल और चमोली जिले के बाडाहोती सीमा पर बीते वर्ष घुसपैठ कर चुका है।

ऐसे में अब चमोली जिले में भारतीय सीमा तक सड़क निर्माण किया जा रहा है। वायु सेना के दो बड़े हेलीकाप्टर सड़क निर्माण से संबंधी मशीनें और जरूरी सामान ढोने में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। बीआरओ को इससे काफी मदद मिल रही है।
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बीआरओ की तीन यूनिटें कर रहीं काम

बीआरओ की 66 आरसीसी गौचर, 75 आरसीसी जोशीमठ और 123 आरसीसी सुराई थोटा सड़क निर्माण में जुटी हैं।

विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण नीति और माणा घाटी के दुर्गम सीमांत इलाकों में मई से सितंबर माह तक ही काम हो सकता है।

वर्ष के सात माह यह क्षेत्र बर्फ से ढका रहता है। वायुसेना की मदद के बाद उम्मीद बढ़ी है कि सड़कों के निर्माण में तेजी आएगी।

बार्डर एरिया के साथ ही चारधाम की सड़कों के निर्माण एवं मरम्मत में तेजी लाई जाएगी। बीआरओ ने सरकार से खनन की अनुमति मांगी है। प्रशासनिक सहयोग तो मिल रहा है, लेकिन सरकार से खनन की अधिकारिक स्वीकृति नहीं मिली है, जिससे कुछ दिक्कतें भी हो रही हैं।
- केके राजदान, चीफ शिवालिक परियोजना बीआरओ ऋषिकेश
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