गंगा सुरक्षा के लिए गौमुख से गंगासागर तक 2700 किमी के बीच आठ इकोलोजिकल जोन बनाए जाएंगे। पांच राज्यों से मशविरा के बाद यह तय हो गया है।
इन राज्यों के विज्ञानियों के बीच पांच राउंड चली बैठक के बाद वन अनुसंधान केंद्र ने रोड मैप तैयार कर लिया है। उत्तराखंड से पश्चिम बंगाल के बीच गंगा किनारे दोनों किनारों पर 50 मीटर तक अलग-अलग प्रकार की बनस्पतियां लगाई जाएंगीं। उत्तराखंड में गंगा किनारे सिर्फ जड़ी-बूटियों के पौधे लगाए जाएंगे।
केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने गंगा सुरक्षा के लिए गौमुख से गंगासागर तक रोड मैप तैयार करने के लिए पांच राज्यों को निर्देश दिए थे। इस पर उत्तराखंड, यूपी, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के विज्ञानियों की बैठक मई में देहरादून स्थित वन अनुसंधान केंद्र (एफआरआई) में हुई थी।
एफआरआई को रोड मैप तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। राज्यों के विज्ञानियों की आखिरी बैठक 3 जुलाई को हुई। इसमें रोड मैप को अंतिम रूप दे दिया गया। उत्तराखंड से पश्चिम बंगाल के बीच अलग-अलग इको सिस्टम के मुताबिक आठ इकोलोजिकल जोन बनाए जाएंगे।
रोड मैप तैयार करने वाली कोर कमेटी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि इकोलोजिकल जोन इको सिस्टम के लिहाज से बनाए गए हैं। आद्रता, ऊष्णता, मिट्टी के प्रकार, जैव विविधता आदि को आधार बनाया गया है। पूरबी उत्तर प्रदेश और बिहार के यूपी से सटे इलाकों का इको सिस्टम मिलता है।
इन दोनों को मिलाकर इकोलोजिकल जोन बना है। इसी तरह बिहार-झारखंड के मिलते इको सिस्टम वाले क्षेत्रों को एक जोन में रखा गया है। इकोलोजिकल जोन के लिहाज से ही यहां बनस्पतियां लगाई जाएंगी।
गौमुख से गंगा सागर तक नदी के किनारे बसी आबादी की स्थिति पता करने की जिम्मेदारी जियोग्राफिकल सर्वे आफ इंडिया और रिमोट सेंसिंग को दी गई है। इस संबंध में दोनों संस्थानों को पत्र भेजा जा चुका है। जहां गंगा किनारे 50 मीटर के दायरे में आबादी है उसे हटाने के लिए संबंधित राज्य सरकार को लिखा जाएगा।