2006 में दून के रायपुर में लगी एक विज्ञान प्रदर्शनी में बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा था।
उस प्रदर्शनी में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्रोटोकॉल तोड़ सीधे बच्चों से मिलने आ पहुंचे। बच्चों ने खुशी से कलाम को घेर लिया। उस दौरान सभी अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए।
कलाम बच्चों से बातें करने में इतने मशगूल हो गए कि उन्होंने किसी बात की परवाह नहीं की। बच्चों की खातिर उन्होंने हिंदी की अधिक जानकारी न होने के बावजूद अटककर हिंदी बोली, तो बच्चे खुश हो गए।
पर्वतीय बाल मंच के समन्वयक सुधीर भट्ट ने पूर्व राष्ट्रपति कलाम के गुजरने पर दुख जाहिर करते हुए उनसे पहली बार मुलाकात के अनुभव को साझा किया। बताया कि वर्ष 2006 में शिक्षा विभाग की ओर से रायपुर में लगाई गई विज्ञान प्रदर्शनी में डॉ. कलाम ने शिरकत की थी। यहां उत्तराखंड के सभी जिलों के बच्चों ने प्रदर्शनी में अपने स्टॉल लगाए थे।
कहा कि राष्ट्रपति प्रोटोकॉल में रहते हैं, लेकिन जिस तरह से कलाम ने हर स्टॉल पर जाकर बच्चों से बात की, वह सभी को आश्चर्य में डालने वाला था। बताया कि ज्यादा हिंदी नहीं आने से वे बच्चों से अंग्रेजी में बात कर रहे थे। जब उन्हें बताया गया कि बच्चे पर्वतीय क्षेत्र से हैं और अंग्रेजी नहीं जानते तो उन्होंने बहुत प्रयास कर अटक-अटककर हिंदी बोलने का प्रयास किया।
उन्होंने बच्चों के बनाए मॉडल की प्रशंसा करते हुए कहा कि गांव के इन बच्चों में हुनर है। उन्होंने बच्चों को साइंटिस्ट बनाने का पाठ पढ़ाया। सुधीर भट्ट ने बताया कि गांव के रहने वाले बच्चे डॉ. अब्दुल कलाम के इस व्यवहार से बहुत हैरान थे। क्योंकि वह यकीन नहीं कर पा रहे थे कि जो व्यक्ति उनके साथ इतने सरल और सहज ढंग से बात कर रहे हैं वे राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हैं।
मिसाइल मैन का दून से था खासा लगाव
मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम का दून से खासा लगाव था। वह कई बार देहरादून के विभिन्न विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होते रहे हैं। स्कूलों में होने वाले कार्यक्रमों में वह अक्सर क्लास टीचर की भूमिका में नजर आते थे।
दून में 29 अप्रैल वर्ष 2015 को पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम कोटरा संतौर स्थित शेमफोर्ड स्कूल में आयोजित समारोह में करीब एक घंटा बच्चों के साथ रहे।
उन्होंने बच्चों को ग्राहम वैल के फोन, राइट बंधु के जहाज का आविष्कार से लेकर मैडम क्यूरी को नोबल पुरस्कार मिलने की जानकारी दी। बच्चों को बताया कि इन सभी लोगों ने किस तरह छोटे स्तर से जीवन की शुरूआत की और जीवन में एक मुकाम हासिल किया। वह बच्चों से खुद सवाल करते और फिर उसका जवाब देते। उन्होंने कहा था कि सपने को साकार करने के लिए उच्च विचार, लगातार अध्ययन और कठिन परिश्रम की जरूरत होती है।
जब अलग लगाई कुर्सी हटवाई
स्कूल में बतौर मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति के लिए मंच पर अलग से कुर्सी लगाई गई थी, लेकिन उन्होंने अलग से लगी इस कुर्सी पर बैठने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि वे आगे सोफे पर सबके साथ बैठेंगे। साथ ही अलग लगी कुर्सी को हटवा दिया था।
‘ज्ञान से ही भर सकते हो ऊंची उड़ान’
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने बच्चों से कहा कि वे उन्हें उड़ना सिखाएंगे। इसके लिए उन्हें यूनीक बनना होगा। उन्हें जिज्ञासु, तर्क करने वाला बनना होगा। बच्चों से कहा कि ज्ञान ही वो पंख है, जिसकी मदद से आप ऊंची उड़ान भर सकते हो।
मिसाइल मैन क्यों कहते हैं?
एक बच्चे द्वारा यह पूछे जाने पर कि उन्हें मिसाइल मैन क्यों कहते हैं। इस पर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा कि वे रॉकेट तकनीकी से जुड़े हैं। ऐसे में कुछ लोग उन्हें रॉकेट मैन तो कुछ मिसाइल मैन कहते हैं।
कई बार मसूरी दौरे पर आए थे कलाम
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम कई बार मसूरी दौरे पर आए। राष्ट्रपति रहते हुए डॉ. कलाम ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में आईएएस अधिकारियों के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया। डॉ. कलाम ने अधिकारियों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया।
डा. कलाम वैज्ञानिक के तौर पर डेढ़ दशक पहले लाल टिब्बा स्थित डीआरडीओ के अधीन प्रौद्योगिकी प्रबंध संस्थान में वैज्ञानिकों को लेक्चर देने आए थे। बतौर राष्ट्रपति डा. कलाम सबसे पहले 27 सितबर 2004 में सेंट जार्ज कालेज मसूरी के 150वें स्थापना दिवस पर आए थे।
तब सेंट जार्ज कालेज के प्रिंसिपल ब्रदर डोमनिक जैकब ने हेलीपेड पर उनका स्वागत किया था। सेंट जार्ज कालेज में डॉ. कलाम करीब डेढ़ घंटे छात्रों के बीच रहे। सेंट जार्ज कालेज की अध्यापिका मधु काला ने बताया कि डा. कलाम ने शिक्षकों से भी संवाद किया था। बताया था कि एक शिक्षक समाज की दिशा और दशा कैसे बदल सकता है।
18 अक्तूबर 2010 को डॉ. कलाम मसूरी इंटरनेशनल स्कूल के फाउंडेशन-डे में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। डा. कलाम ने मंच से बिना किसी औपचारिकता के छात्रों से सवाल-जवाब किए थे।