उत्तराखंड आपदा के बाद क्षतिग्रस्त सड़क मार्गों को तेजी से बहाल करने में खराब मौसम के बीच सीमित संसाधन भी बाधा बने हैं। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) का जोर राष्ट्रीय राजमार्गों को खुला रखने पर है।
उत्तरकाशी और चमोली जनपद बीआरओ के लिए सबसे अधिक चुनौती भरे हैं। बीते दिनों हुई लगातार बारिश ने नए भूस्खलन जोन खोल दिए हैं, जबकि भटवाड़ी सहित कुछ जगह स्थानीय लोगों का विरोध बढ़ने से कार्य प्रभावित हो रहा है।
मार्ग खोलना आसान नहीं
बीआरओ के सामने दो राष्ट्रीय राजमार्गों ऋषिकेश-धरासू-उत्तरकाशी-गंगोत्री और ऋषिकेश-जोशीमठ-बदरीनाथ-माणा सहित सैकड़ों किलोमीटर के जनरल स्टाफ रोड (सैन्य इस्तेमाल वाले मार्गों) को अक्तूबर तक यातायात के लिए खोलना आसान नहीं हैं।
उत्तरकाशी में बीआरओ ने मनेरी तक पहुंच बना ली है, लेकिन भटवाड़ी को जोड़ पाना खराब मौसम के चलते संभव नहीं हो पा रहा है। छह और सात अगस्त को हुई भारी बारिश से उत्तरकाशी में सड़क निर्माण सर्वाधिक प्रभावित हो रहा है।
बारिश से हुए नुकसान के बाद भटवाड़ी में स्थानीय लोगों की ओर से बीआरओ के एक कर्मचारी के साथ मारपीट की शिकायत संगठन ने डीएम को की है।
भूस्खलन के ताजा क्षेत्र विकसित होने से गंगोरी में काम प्रभावित है। चमोली जनपद में भी बादल फटने के बाद सड़क निर्माण के कार्य को भारी धक्का पहुंचा है।
रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी मार्ग स्थित सिम्मी गांव के धंसने से वहां ग्रामीणों के विरोध के चलते सड़क निर्माण कार्य रोकना पड़ा है। ऐसे में एक ओर तो अधिक मशीनरी की जरूरत है, जबकि रास्ते बंद, खराब होने से भारी उपकरणों का पहुंचना भी दूभर हो गया है।
स्वीकृति की भी हैं दिक्कतें
वर्ष 2011 से लेकर अब तक बीआरओ की केवल आठ परियोजनाएं केंद्रीय मंत्रालय से स्वीकृत हुईं हैं। वहीं, बजट की स्थिति भी डीपीआर की तरह ही है। स्वीकृत योजनाओं के लिए लगभग 100 करोड़ ही स्वीकृत हुए।
अब बीआरओ ने आपदा के बाद नए सिरे से प्रस्ताव भेजे हैं, जिनकी स्वीकृति के बाद कार्य तेज हो पाएगा। फिलहाल केंद्र ने बीआरओ को 50 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
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