बाबूराम अपनी तरक्की के लिए कोर्ट-कचहरी में अरसे से जद्दोजहद कर रहे थे। यह लड़ाई तो वह जीत गए लेकिन इसकी खुशी दो घंटे ही नसीब हो पाई।
उन्हें दो दिन ही प्रवक्ता पद पर रहकर रिटायर हो जाना था। लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। जिस शुक्रवार को सम्मान के साथ नौकरी से उनकी विदाई होनी थी उसी दिन हादसे का शिकार हुए बाबूराम जिंदगी से ‘रिटायर’ हो गए।
हाईकोर्ट में गुहार लगाई थी
लक्सर कस्बे के केवी इंटर कालेज के मुंडाखेड़ाखुर्द निवासी शिक्षक बाबूराम को दो साल पहले वरिष्ठता के आधार पर प्रवक्ता का पद मिलना था। प्रबंधन तंत्र ने उनकी जगह प्रवक्ता पद पर सीधी भर्ती करते हुए किसी अन्य शिक्षक को तैनाती दे दी। अपने हक से वंचित बाबूराम ने कालेज प्रबंधन के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में गुहार लगाई।
दो साल तक मामला चलादो साल तक यह मामला तारीखों और पेशियों की सीढ़ियां चढ़ता रहा। आखिरकार हाईकोर्ट से उनके हक में ही फैसला सुनाते हुए उन्हें प्रवक्ता के पद पर तैनाती का हुक्म दे दिया। बुधवार को उन्होंने बाकायदा प्रवक्ता पद पर ज्वाइन भी कर लिया था।
उसके ठीक दो दिन बाद शुक्रवार को उनका रिटायरमेंट था। इसी खुशी में वह मिठाई लेने के लिए पैदल जा रहे थे। इसी बीच ओवरब्रिज के पास एक बाइक सवार ने उन्हें टक्कर मार दी थी। हादसे में उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं। उन्हें पहले रुड़की अस्पताल और फिर वहां से हायर सेंटर भेजा गया। देहरादून स्थित मैक्स अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था, जहां शुक्रवार को वह जिंदगी की जंग हार गए।
सिर्फ दो घंटे नसीब हुई खुशी
बाबूराम को शायद गुमान भी नहीं रहा होगा कि उन्नत पद पर ज्वाइनिंग के बाद उसके पास खुशी मनाने के लिए मात्र दो घंटे का ही वक्त है। हुआ भी यही, दुर्घटना ने एकाएक उनकी खुशी के लम्हे कम कर दिए बल्कि परिजनों को भी गम के समंदर में डुबो दिया। दो दिन बाद उन्हें जिंदगी से भी रुख्सत कर दिया। इसे बाबूराम की जिंदगी का इत्तेफाक ही कहेंगे कि तरक्की वाले पद पर ज्वाइनिंग के दिन दुर्घटना और रिटायरमेंट के दिन मौत मिली।