राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) की तर्ज पर प्रदेश में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की गई है। आरएसबीआई के साथ राज्य कर्मचारियों की यू हेल्थ कार्ड योजना में अभी तक चालीस फीसदी से कम पंजीकरण हुआ है।
30 हजार रुपए तक के निशुल्क इलाज
कैशलेस कार्ड होने के बावजूद क्लेम संबंधित कई दिक्कतें आ रही हैं। दोनों योजनाओं के दायरे में नहीं आने वाले परिवार मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल होंगे।
प्रत्येक परिवार को निजी अस्पतालों में 30 हजार रुपए तक के निशुल्क इलाज का लाभ मिलेगा। हेल्थ कार्ड को राज्य सरकार की अन्य योजनाओं के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।
आरएसबीवाई के तहत बीपीएल, मनरेगा लाभार्थी, फैक्टिरियों के श्रमिक एवं शहरी क्षेत्रों के मलिन बस्तियों के लोग शामिल हैं। राज्य कर्मचारियों के लिए यू हेल्थ कार्ड योजना अलग से चल रही है। इसके अलावा सभी एपीएल और अन्य मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल होंगे।
35 रुपए में रजिस्ट्रेशन
योजना के तहत केवल 35 रुपए पंजीकरण फीस देकर प्रति परिवार तीस हजार हजार रुपए तक की कैशलेस सुविधा अस्पताल में भर्ती होने पर मिलेगी। आरएसबीवाई की तरह बायोमेट्रिक कार्ड बनेगा, जिसमें पूरे परिवार का डाटा मौजूद रहेगा। अस्पताल आने तक के लिए 100 रुपए दिये जाने का प्रावधान इसमें है। सरकार का इस योजना पर 10 करोड़ रुपए वार्षिक खर्च करने पड़ेंगे।
आरएसबीआई की धीमी रफ्तार
आरएसबीआई के तहत चिन्हित लाभार्थी 11.5 लाख है। इसमें से अभी तक केवल तीन लाख लोगों के ही बीमा कार्ड बन पाए हैं। अधिकांश जगह सर्वे नहीं हो पाया जिससे चिन्हित लोगों को कार्ड दिया जा सके। इसके तहत शामिल बीमा कंपनियों की मनमानी पर स्वास्थ्य विभाग ने आपत्ति केंद्र को दर्ज करवाई है।
यू हेल्थ कार्ड का आकर्षण कम
राज्य सरकार के ढ़ाई लाख कर्मचारियों के लिए यू हेल्थ कार्ड योजना प्रदेश सरकार ने शुरू की है। इस योजना को जिस कंपनी के साथ मिलकर शुरू किया गया था वह 2012 में करार तोड़कर चली गई, जिसके बाद योजना पटरी से उतर गई। अब विभाग ने खुद योजना का संचालन शुरू किया है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है।
डीएम को पांच करोड़ तक का अधिकार
राज्य कैबिनेट ने दैवी आपदा संबंधी कार्यों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए जिलाधिकारियों के वित्तीय अधिकार बढ़ा दिए हैं। अब डीएम आपदा प्रभावित कार्यों, पुनर्निर्माण आदि के लिए पांच करोड़ की स्वीकृति दे सकेंगे। पिछले दिनों सरकार ने उप-जिलाधिकारियों को एक करोड़ रुपए तक की स्वीकृति देने का अधिकार दिया था।
अब डीएम को भी पांच करोड़ तक की अनुमति का अधिकार दे दिया गया है। अब तक डीएम को 25 लाख और कमिश्नर को 50 लाख रुपए तक के कार्य स्वीकृत करने का अधिकार था। इस धनराशि से ज्यादा खर्च करने के लिए शासन की अनुमति लेनी पड़ती थी। अब शासन से पांच करोड़ से ऊपर के कार्यों की मंजूरी ली जाएगी।