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मंजिल तक पहुंचाने वाली सड़क बन रही 'मौत' का सबब

Mon, 14 Oct 2013 09:54 AM IST
अमर उजाला, ऋषिकेश
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पौड़ी जिले के सैकड़ों गांवों और प्राचीन नीलकंठ मंदिर को जोड़ने वाले मोटर मार्ग पर सफर करना काफी जोखिम भरा है।
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भारी गड्ढे दुर्घटनाओं को दे रहे आमंत्रण
लक्ष्मणझूला-घट्टूगाड़-कांडी मोटर मार्ग पर जगह-जगह पड़े भारी गड्ढे दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं। बावजूद इसके सरकार और संबंधित विभाग उदासीन बने हैं। स्थानीय लोगों ने मार्ग के विस्तारीकरण के साथ ही डामरीकरण की मांग उठाई है।

लक्ष्मणझूला मोटर मार्ग पर डेढ़ दशक से डामरीकरण कार्य नहीं हो पाया है। 1998-2000 के  बीच हुए मरम्मत कार्य के बाद आज तक राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग ने इसकी सुध नहीं ली।
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इससे इस पर आवागमन किसी खतरे से खाली नहीं है।

जोखिम उठाकर कर रहे यात्रा
बावजूद इसके यमकेश्वर, द्वारीखाल प्रखंड के दो सौ से अधिक गांवों और आंशिक रूप से दुगड्डा प्रखंड के लोग मार्ग पर जोखिम उठाकर यात्रा करने को अभिशप्त हैं।

इतना ही नहीं कुंभ मेला और हर साल श्रावण यात्रा के दौरान इसी मार्ग पर प्राचीन नीलकंठ धाम की यात्रा संचालित की जाती है।

कई दृष्टि से अहम सड़क की हालत किसी को नहीं दिखाई पड़ती। स्थिति यह है कि लोगों को भारी गड्ढों से युक्त इस सड़क पर धूलधूसरित यात्रा करनी पड़ रही है।

मानकों की भी हो रही अनदेखी
लोक निर्माण विभाग के मानकों पर गौर करें तो हर साल सड़कों के लिए वार्षिक मरम्मत के लिए बजट उपलब्ध  कराया जाता है, मगर इस पर डेढ़ दशक से मरम्मत नहीं हुई है।
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जबकि प्रत्येक पांच वर्ष में सड़क की मरम्मत होनी चाहिए, मगर इस महत्वपूर्ण मार्ग के लिए 15 साल में एक बार भी बजट नहीं मिला।

क्या कहते हैं स्थानीय
मागथा के प्रधान सुनील बड़थ्वाल, तोली के पूर्व प्रधान धन सिंह राणा, कोठार के पूर्व प्रधान पूरण सिंह पयाल, बोंगा के पूर्व प्रधान दौलतराम, सोहन लाल भट्ट, पूर्व बीडीसी मेंबर केके कंडवाल, अनीता भट्ट, क्षेत्रवासी बलवंत सिंह नेगी, संजय भट्ट, मनोज राणा आदि का कहना है कि मार्ग कई स्थानों पर बेहद खतरनाक है।

मरम्मत के अभाव में वाहनों के अनियंत्रित होने और आपस में टकराने की घटनाएं आम हैं। बावजूद इसके शासन-प्रशासन लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहा है।

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