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ऋषिकेश: सिस्टम की काहिली के बीच एंबुलेंस में इधर से उधर भटकता रहा मरीज 

Sun, 29 Nov 2020 11:51 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश

सार

  • ट्रांसफार्मर की चपेट में आकार बुरी तरह झुलस गए थे दो युवक, एक की हालत गंभीर
  • सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं, कोरोनेशन में बेड और एम्स में बर्न यूनिट ही नहीं 
  • 24 घंटे बाद भी नहीं मिला इलाज, देर रात एक युवक को चंडीगढ़ ले जाने की थी तैयारी
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मरीज को लेजाते लोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बदनाम हो चुके उत्तराखंड राज्य में सिस्टम की काहिली का रोज एक नया केस सामने आ रहा है। राज्य के दूरस्थ इलाकों में तो स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल किसी से छुपा नहीं है, लेकिन जब बात राजधानी की हो तो मामला और भी गंभीर हो जाता है।

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तीर्थनगरी में शुक्रवार रात दो युवक ट्रांसफार्मर की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए। इनमें से एक ही हालत अत्यधिक गंभीर है। लेकिन घायल युवक को शनिवार देर रात तक भी अस्पताल का ठौर नहीं मिल पाया था। बेहद गरीब परिवार से तालुक रखने वाले इस युवक के परिजन देर रात युवक को एंबुलेंस का जुगाड़ कर पीजीआई चंडीगढ़ ले जाने की जुगत में लगे थे। 

शुक्रवार रात भरैव कॉलोनी चंद्रभागा तटबंध के समीप एक युवती की शादी थी। इधर, शादी की रस्में निभाई जा रही थी, तभी बाहर कुछ युवकों में आपस में विवाद हो गया। इस दौरान संजीत (21) पुत्र मुंशीराम निवासी भैरव कॉलोनी 1100 केवी विद्युत लाइन से जुड़े ट्रांसफार्मर की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गया। संजीत को बचाने आए किशन (22) पुत्र नेपाली भी करंट की चपेट में आकर झुलस गया।
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इसके बाद मौके पर मौजूद लोग और पुलिस के जवान आनन-फानन में दोनों एसपीएस राजकीय चिकित्सालय ले गए। जहां चिकित्सकों ने दोनों को देहरादून स्थित कोरोनेशन अस्पताल में रेफर कर दिया। सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार, संजीत 75 प्रतिशत, जबकि किशन 60 प्रतिशत झुलसा हुुआ था। 

अस्पताल दर अस्पताल भटकने की कहानी 

एसपीएस राजकीय चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार के बाद दोनों युवकों को देहरादून स्थित कोरोनेशन अस्पताल ले जाया गया। लेकिन वहां बेड की अनुपलब्धता के कारण उन्हें बैरंग कर दिया गया। रात तीन बजे परिजन युवकों को लेकर फिर से घर पहुंच गए। इसके बाद पार्षद शकुंतला शर्मा की पहल पर सुबह 5 बजे झुलसे युवकों को पुन: राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश में भर्ती किया गया। लेकिन यहां भी सुबह 11 बजे तक इलाज शुरू नहीं किया गया।

मौके पर मौजूद युवक की माता सेफाली देवी, बहन गुड्डी और भाई शंकर एक ही बात कह रहे थे, कोई डॉक्टर को बुला दो। डॉक्टर तो नहीं आए, लेकिन एक कर्मचारी संजीत को एम्स रेफर किए जाने का पर्चा लेकर पहुंच गया। 12 बजे के करीब संजीत को एम्स की इमरजेंसी में ले जाया गया। लेकिन देर शाम ड्रेसिंग आदि के बाद उन्हें अस्पताल में बर्न यूनिट न होने की वजह से मरीज को कहीं और ले जाने को कह दिया गया। इस बीच संजीत के परिजन बराबर अमर उजाला को अपडेट देते रहे।

देर रात खबर लिखे जाने तक परिजन संजीत को पीजीआई चंडीगढ़ ले जाने की तैयारी कर रहे थे। संजीत का पूरा परिवार दिहाड़ी-मजदूरी कर अपना पेट पालता है। ऐसे में उन्हें फिलहाल इलाज तो नहीं मिला, लेकिन एक के बाद एक अस्पताल के चक्कर काटने में एंबुलेंस के खर्चे का मीटर लगातार चल रहा है। दूसरी तरफ किशन अभी भी राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश में ही भर्ती है। उसकी भी हालत नाजुक बनी हुई है। 

दोनों युवक अधिक झुलस गए थे, जिसके कारण उन्हें हायर सेंटर कोरोनेशन अस्पताल रेफर करना पड़ा। कोरोनेशन में बेड नहीं होने के कारण दोनों मरीजों को फिर एसपीएस राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश में ही भर्ती करना पड़ा। शनिवार को उनमें से एक मरीज को एम्स में रेफर करना पड़ा। यदि एम्स में भी मरीज को नहीं ले रहे हैं तो फिर मरीज के परिजनों को लिखित में पत्र देकर मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ेगा। फिर हमारी ओर से जो भी होगा, हम पूरी कोशिश करेंगे।
 - नरेंद्र सिंह तोमर, सीएमएस, एसपीएस राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश 

एम्स में फिलहाल बर्न यूनिट नहीं है। संजीत को एम्स की इमरजेंसी में लाया गया था, जो भी बेहतर इलाज हो सकता था, उसे दिया गया। कोविड के चलते अस्पताल में बर्न यूनिट अभी शुरू नहीं हो पाई है। बावजूद इसके संजीत को बेहतर इलाज देने की कोशिश की रही थी, लेकिन परिजनों द्वारा खुद से उसे पीजीआई चंडीगढ़ ले जाने की बात कही जा रही थी।
 - हरीश थपलियाल, वरिष्ठ जन संपर्क अधिकारी, एम्स ऋषिकेश
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सड़क, गली, चौराहों पर खड़े मौत के ट्रांसफार्मर

शहर की गलियों और चौराहों पर मौत के ट्रांसफार्मर खड़े हैं। कई लोग इन ट्रांसफार्मरों से टकराकर, इनके करंट से अपनी जीवन लीला से हाथ चुके हैं। इसके बाद भी शहर की गलियों और चौराहों से ट्रांसफार्मरों शिफ्ट नहीं किया जा रहा है। शहर में खतरनाक जगहों पर रखे ट्रांसफार्मर को शिफ्ट करने के लिए ऊर्जा निगम, नगर निगम से बजट की मांग करता है, बजट के अभाव में नगर निगम भी हाथ खड़े कर देता है।  

शहर में नगर निगम कार्यालय के बाहर एक ट्रांसफार्मर जमीन से पांच फीट की ऊंचाई पर है। इस ट्रांसफार्मर से सटकर विक्रम खड़े होते हैं। हरिद्वार रोड टैक्सी स्टैंड के सामने अतिक्रमण हटने के बाद रैंप पर रखा ट्रांसफार्मर अब बीच सड़क में आ गया है, मुखर्जी मार्ग पर भी सुनार की दुकान के पास बीच ट्रांसफार्मर लगा है। इसके नीचे चाय की दुुकान चलती है, यहां भी कभी बड़ी दुुर्घटना हो सकती है।

लेकिन ऊर्जा निगम का ध्यान केवल राजस्व वसूली पर ही है। 25 अक्तूबर को ट्रांसफार्मर के पोल से टकराकर एक युवक की मौत हो चुकी है। ऊर्जा निगम के इस घटना के लिए रेलवे को जिम्मेदार बताया था। ऊर्जा निगम के ईई डीपी सिंह का कहना था कि उन्होंने रेलवे स्टेशन के बाहर लाइन को शिफ्ट कराने के लिए रेलवे इंजीनियरिंग विभाग केे 28 लाख की डीपीआर बनाकर भेजी थी, लेकिन रेलवे ने कोई जवाब नहीं दिया। जिस प्रकार चंद्रभागा पुल के पास भैरव कॉलोनी में घटना घटी उससे ऊर्जा निगम को सबक लेना होगा। जो ट्रांसफार्मर नीचे रखे हैं उन्हें ऊंचे रैंप में रखना होगा। 

विद्युत सुरक्षा विभाग भी करेगा दुर्घटना की जांच 
शुक्रवार की रात को ट्रांसफार्मर के करंट से दो युवकों के झुलसने के मामले की जांच विद्युत सुरक्षा विभाग करेगा। विद्युत सुरक्षा अधिकारी ने बताया जल्द ही मौके पर जाकर पीड़ित के परिजनों और ऊर्जा निगम के अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। चंद्रभागा पुलिस के पास शुक्रवार को शादी समारोह में आए दो युवक ट्रांसफार्मर के करंट से झुलस गए थे। इस दुर्घटना में संजीत पुत्र मुंशीराम, किशन पुत्र नेपाली गंभीर रुप से झुलस गए थे। खबर प्रकाशित होने के बाद विद्युत सुरक्षा विभाग ने संज्ञान लिया है। विद्युत सुरक्षा अधिकारी रुड़की जोन डीपी सिंह ने बताया कि जल्द ही वे मौके पर जाकर जांच करेंगे, इस मामले में ऊर्जा निगम के अधिकारियों से बयान दर्ज किए जाएंगे।
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