जिस पर कक्कड़ ने उन्हें देहदान के लिए प्रेरित किया। दंपति मनोज लाल और विनीता ने देहदान के लिए सहमति दी। कक्कड़ की सूचना पर गोपाल नारंग ने मोहन फाउंडेशन के उत्तराखंड प्रोजेक्ट लीडर संचित अरोड़ा से संपर्क किया। उनकी सहायता से कागजी कार्रवाई पूरी की गई और ग्राफिक एरा मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉक्टर आरके रोहतगी को बच्चे की देह सौंपी गई।
हमारा सपना नहीं हुआ पूरा, लेकिन किसी और का होगा
मोहन लाल ने कहा कि बच्चे के जन्म को लेकर हर मां-बाप का कोई न कोई सपना होता है। अपने बच्चे को लेकर हमारे भी कई सपने थे। लेकिन हमारे सपने पूरे नहीं हो सके। भगवान ने हमारा बच्चा हम से छीन लिया। हमने सोचा कि हमारे सपने तो पूरे नहीं हुए, हम अपने बच्चे का देहदान करेंगे तो उन माता पिता के सपने पूरे होंगे जिनके बच्चे डाक्टरी की पढ़ाई कर रहे हैं। यहीं सोचकर हमने नवजात के देहदान का निर्णय लिया।