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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: पहाड़ की सपनों की रेल को लगे तीन और 'पंख'

Fri, 09 Oct 2020 12:32 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विनोद मुसान, अमर उजाला, ऋषिकेश
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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पहाड़ों में सपनों की रेल को तीन और नए पंख लग गए हैं। जी हां, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना ने निर्माण का एक और चरण पूरा कर लिया है। इसके तहत कुल छह एडिट सुरंगों में से तीन का निर्माण कार्य पूरा हो गया है।

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जल्द ही तीन अन्य पर काम शुरू किया जाएगा। परियोजना के तहत कुल 125 किमी. लंबाई की बनने वाली रेल लाइन कुल 17 सुरंगों से होकर गुजरेगी। इन सुरंगों की कुल लंबाई 104 किमी. है। इन्हीं सुरंगों को बनाने में ये एडिट सुरंगें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

एडिट सुरंगें वे सुरंगें होती हैं, जो सड़क मार्ग से मुख्य सुरंग तक पहुंचने का रास्ता बनाती हैं। इससे मुख्य सुरंग का निर्माण आसान हो जाता है। आमतौर पर यह मुख्य सुरंग के बीच वाले हिस्से को सड़क से जोड़ती हैं। ताकि मुख्य सुरंग का निर्माण बीच से दोनों ओर शुरू किया जा सके।
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इससे मशीनों को लाने-ले जाने में भी मदद मिलती है। यह तीनों सुरंगें नीरगड्डू, शिवपुरी और गुल्लर दोगी के पास बनाई गई हैं। तीनों एडिट सुरंगों को पूरा करने का काम एपको इंफ्राटेक प्रा. लि. कंपनी की ओर से किया गया है। जबकि तीन अन्य एडिट सुरंगों का निर्माण भी इसी कंपनी द्वारा किया जा रहा है। 

एडिट-1 सुरंग की कुल लंबाई 201 मीटर है, जबकि इसका निर्माण भारतीय रेल के मार्गाधिकार क्षेत्र में छह हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बनाया गया है। वहीं, एडिट-2 की कुल लंबाई 555 मीटर और एडिट-3 की कुल लंबाई 770 मीटर है। इसका निर्माण सितंबर माह में पूरा कर लिया गया है। इसका निर्माण कार्य भारतीय रेलवे के मार्गाधिकार क्षेत्र में 13000 वर्गमीटर क्षेत्रफल में किया गया है।

रेल विकास निगम के परियोजना प्रबंधक ओम प्रकाश मालगुडी ने बताया कि तीनों सुरंगों के निर्माण में अंतरराष्ट्रीय मानकों से युक्त उच्च तकनीक की मशीनों को प्रयोग किया गया। तीनों सुरंगें राष्ट्रीय राजमार्ग 58 को मुख्य सुरंग से जोड़ने का काम करेंगी। इसके अलावा तीन अन्य एडिट सुरंगों के निर्माण का काम प्रगति पर है। ये तीनों सुरंगें पैकेज 6, 7ए और 7बी में बन रही हैं। 

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टनल आठ के भीतर बनने वाला स्टेशन में अब जनासू में बनेगा

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत अब ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेलवे स्टेशनों की संख्या 13 होगी। इससे पहले परियोजना में 12 स्टेशन प्रस्तावित थे। पौड़ी जिले में मलेथा के पास जनासू में एक नया स्टेशन बनाया जाएगा।

पहले यह स्टेशन टनल संख्या आठ के भीतर ही बनना प्रस्तावित था। जिसको अब बाहर जनासू में बनाया जा रहा है। रेल विकास निगम के परियोजना प्रबंधक ओमप्रकाश मालगुडी ने बताया कि पैकेज-4 में देवप्रयाग से जनासू तक 14.5 किलोमीटर लंबी टनल (सुरंग) का निर्माण किया जाना है। इसके तहत जनासू में रेलवे स्टेशन प्रस्तावित है।

डबल ट्यूब टनल होगी टनल-8

देवप्रयाग से जानसू के बीच 14.5 किमी. लंबी सुरंग डबल ट्यूब टनल होगी। इस सुरंग में एक सुरंग से गाड़ी आएगी, जबकि दूसरी सुरंग से गाड़ी जाएगी। 

योग नगरी ऋषिकश के बाद सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन चौरास में 

ऋषिकेश रेलवे स्टेशन के बाद दूसरा सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन चौरास (श्रीनगर) में बनेगा। ओमप्रकाश मालगुडी ने बताया कि चौरास में इस स्टेशन के निर्माण के लिए दियूली, रानीहाट और नैथाना गांव के ग्रामीणों की भूमि ली गई है। अभी इस स्टेशन का नाम फाइनल नहीं हुआ है। जिलाधिकारी की ओर से नाम भेजे जाने के बाद मुरादाबाद रेल मंडल की ओर स्टेशन के नाम का नोटिफिकेशन किया जाएगा। 

17 सुरंगों का लेखा-जोखा

ढालवाला से शिवपुरी- 10.8 किमी.
शिवपुरी से गुलर- 6.4 किमी.
गूलर से व्यासी- 6.7 किमी.
व्यासी से कौडियाला- 2.2 किमी.
कौडियाला से बागेश्वर- 9.7 किमी.
राजचौरा (गंगा पार) से पौड़ी नाला- 220 मीटर
पौड़ी नाला से देवप्रयाग, 1.2 किमी.
देवप्रयाग से जनासू- 14.5 किमी.
लछमोली से मलेथा- 2.8 किमी.
मलेथा से श्रीनगर-  4.1 किमी.
श्रीनगर से धारी- 9.0 किमी.
धारी से नरकोटा- 7.0 किमी.
नरकोटा से तिलानी- 9.4 किमी.
तिलानी से घोलतीर- 6.4 किमी.
घोलतीर से गोचर- 7.1 किमी. 
रानो से सिवाई- 6.4 किमी.
सिवाई से कर्णप्रयाग - 200 मीटर
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