उन्होंने कहा कि तीसरे दिन बच्चे को जौलीग्रांट अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद उसके परिजनों को सूचना दी गई, यह भी संदेहास्पद है। उन्होंने कहा कि जौलीग्रांट अस्पताल से भी पूछा जाएगा कि यदि बच्चे की मृत्यु निमोनिया से हुई है तो किस स्तर पर लापरवाही बरती गई।
आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि एकेडमी स्थित हॉस्टल के बगल में ही कब्रिस्तान होना कई सवाल खड़े करता है। इस संबंध में आयोग ने डीएम देहरादून और एसएसपी को गहन जांच करने की सिफारिश की है। इस दौरान आयोग की सदस्य सीमा डोरा भी उपस्थित रही।
आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने बताया कि आखिर हॉस्टल के बगल में ही स्कूल प्रबंधन ने कब्रिस्तान कैसे बना दिया? इसकी इजाजत उन्हें कैसे मिली? स्कूल प्रबंधन से पूछा कि कब्रिस्तान में दफन होने वाले का नाम, पता, जन्मतिथि सहित अंतिम क्रिया की तिथि उसकी कब्र के ऊपर क्यों नहीं लगाई गई है? इस पर स्कूल प्रबंधन ने गोलमोल जवाब दिया।
आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने बताया कि चिल्ड्रन होम एकेडमी में सोमवार को जब वह निरीक्षण करने पहुंची तो लापरवाही का नमूना देखने को मिला। उन्होंने वार्डन से पूछा कि सब कुछ ठीक चल रहा है तो वार्डन ने हां में जवाब दिया। जब उन्होंने पूछा कि बच्चे सब स्वस्थ हैं, तो वार्डन ने कहा कि गर्ल्स हॉस्टल में दो और ब्वॉयज हॉस्टल में तीन छात्र बीमार हैं। इसके बाद आयोग ने कड़ी फटकार लगाई तो बीमार बच्चों को अस्पताल ले जाया गया।
कब्रिस्तान वाली बात जांच में क्यों नहीं आ रही?
अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि आयोग स्कूल प्रबंधन को नोटिस भेज रहा है। इसके अलावा जांच के आदेश जिलाधिकारी देहरादून और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दिए गए हैं। साथ ही रानीपोखरी पुलिस से भी पूछा जाएगा कि आखिर जांच में यह बात क्यों नहीं आ रही कि हॉस्टल के बगल में कब्रिस्तान क्यों और किसकी अनुमति से बनाया गया है। अब तक कितने लोगों को कब्रिस्तान में दफन किया गया है, इसकी भी पड़ताल करवाई जाएगी।