ग्रीन कॉरिडोर के लिए ली 9 जनपदों की पुलिस की मदद
डाॅ. भारत ने बताया कि विभिन्न अंगों को निर्धारित समय के भीतर गंतव्य तक पंहुचाने के लिए उत्तराखंड, यूपी और दिल्ली के 9 जिलों की पुलिस से ग्रीन कॉरिडोर बनाने के लिए मदद ली गई। ताकि सभी अंगों की निश्चित समय के भीतर संबंधित अस्पतालों तक पहुंचाया जा सके। इसमें एम्स ऋषिकेश से जौलीग्रांट एयरपोर्ट, ऋषिकेश से दिल्ली और चंडीगढ़ स्थित अस्पताल तक का रूट शामिल था। अपराह्न समय अस्पताल प्रशासन द्वारा सम्मान के साथ रघुवीर की देह एम्स ऋषिकेश से गंतव्य स्थान के लिए भिजवाई गई।
इन डाॅक्टरों की रही विशेष भूमिका
इस प्रक्रिया में एम्स के न्यूरो सर्जन डाॅ. रजनीश अरोड़ा के अलावा डाॅ. संजय अग्रवाल, डाॅ. रोहित गुप्ता, डाॅ. अंकुर मित्तल, डाॅ. करमवीर, डाॅ. नीति गुप्ता, डाॅ. मोहित धींगरा, डाॅ. लोकेश अरोड़ा, डाॅ. आशीष भूते और डाॅ. आनन्द नागर आदि विशेषज्ञ शामिल थे। संस्थान में अंग प्रत्यारोपण इकाई के समन्वयक देशराज सोलंकी व डीएनएस जीनू जैकेब की टीम का सहयोग रहा जबकि संस्थान के पीआरओ डाॅ. श्रीलोय मोहन्ती और डीएमएस डाॅ. रवि कुमार आदि ने राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो ) और संबंधित जिला प्रशासन व अस्पतालों सहित विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर पूरी प्रक्रिया में विशेष भूमिका निभाई।
एम्स ऋषिकेश में कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन का यह दूसरा मामला है। इससे पहले 2 अगस्त 2024 को हरियाणा के रहने वाले एक 25 वर्षीय कांवड़िये के अंगदान की प्रक्रिया भी इसी संस्थान में सकुशल संपन्न हुई थी। रघुवीर भले ही अब दुनिया में नहीं है लेकिन वह अनेक लोगों कोे जीवन दान दे गए हैं। वह मरकर भी अमर हैं। अंगदान महादान है। हमें चाहिए कि हम समाज में भी लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करें। इस प्रक्रिया में शामिल डाॅक्टरों की टीम का कार्य प्रशंसनीय है।
- प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ऋषिकेश