नोडल अधिकारी कपिल जोशी की रिपोर्ट में इन तमाम अनियमितताओं का बिंदुवार ब्योरा दिया गया था। इतना ही नहीं तमाम वन अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे। इसके बाद एनटीसीए, केंद्र के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से भी टाइगर सफारी निर्माण में हुई धांधली पर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी।
नैनीताल हाईकोर्ट ने भी इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट मांगी थी। एक के बाद एक, अब तक इस मामले में राज्य, केंद्र और कोर्ट की कुल मिलाकर नौ एजेंसियां शामिल हो चुकी हैं। बावजूद इसके बात जांच से आगे नहीं बढ़ पा रही है। इस मामले में लिप्त अधिकारियों के अब भी कुर्सी पर जमे होने से शासन की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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मामले में विभिन्न पहलुओं पर जांच जारी है। एफएसआई से भी कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। मैं इस बात को पहले भी कह चुका हूं और फिर दोहरा रहा हूं। इस मामले में लिप्त किसी भी दोषी अधिकारी को बख्सा नहीं जाएगा।
- आरके सुधांशु, प्रमुख सचिव, वन