करोड़ों रुपये कीमत की संपत्ति पर कई बार हो चुका है खेल
बताया जा रहा है कि देहरादून स्थित राजस्व परिषद में श्याम सुंदर सिंघानिया नामक व्यक्ति ने इस भूमि पर अपना स्वामित्व बताते हुए एक वाद दायर किया था। राजस्व परिषद ने जब मामले की सुनवाई की तो उस दौरान अभिलेखों और साक्ष्य के अभाव में विद्यापीठ की करोड़ों की भूमि तनहा खाते के तौर पर दूसरे के नाम दर्ज कर दिया गया। इसमें तहसील प्रशासन ने भी कोई विचार विमर्श नहीं किया और संपत्ति के अभिलेखों में परिषद के आदेश का आधार बनाते हुए नाम दर्ज कर दिया।
1913 में निर्वाणी अखाड़े ने दान की थी ब्रह्मचर्य आश्रम को जमीन
जिस करोड़ों रुपये की जमीन को लेकर राजस्व परिषद से लेकर जिला प्रशासन तक हड़कंप मचा हुआ है, उसके जो दस्तावेज सामने आ रहे हैं, इसमें निर्वाणी अखाड़े के रिकॉर्ड भी अहम साबित होंगे। यह भूमि निर्वाणी अखाड़े ने वर्ष 2013 में ऋषिकुल विद्या पीठ ब्रह्मचर्य आश्रम को दान में दी थी। दाननामा सहारनपुर के मुआफिस खाने से मंगवाया गया है।
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पार्किंग या बरातघर बनाने की तैयारी
ऋषिकुल विद्यापीठ की भूमि को संरक्षित करने के लिए प्रशासन इसे रानीपुर मार्केट के सघन आबादी क्षेत्र में वाहन पार्किंग या बरातघर के रूप में व्यावसायिक दृष्टिकोण से उपयोग में लाने की तैयारी में है। प्रशासन का मानना है कि पहले तो पैमाइश कराने के साथ ही इसकी चहारदीवारी बनाई जाएगी। वहीं, वाहन पार्किंग का संचालन करते हुए इससे आय के श्रोत बनाए जाएंगे। मौके का मुआयना करने पहुंची सिटी मजिस्ट्रेट कुश्म चौहान ने कहा कि फिलहाल अभी इसकी पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जा रही है। बाद में किस मद से खाली पड़े प्लॉट को उपयोग में लाया जा सकता है इस पर विचार होगा।