अखबार को ज्यादा बेहतर बताया
किताबों और अखबारों से मिले ज्ञान से हम एक बेहतर भविष्य तैयार कर सकते हैं। अच्छे शब्दों को अपने दिमाग में रखें। इस मौके पर मनोवैज्ञानिक वीना कृष्णनन ने छात्र-छात्राओं के साथ जिम्मेदारी शब्द पर चर्चा की। उन्होंने भी सोशल मीडिया और वेब न्यूज की तुलना में अखबार को ज्यादा बेहतर बताया।
कहा कि सोशल मीडिया से कई बार हमें झूठी खबरें मिलती हैं, जबकि अखबार में छपे हर शब्द में सत्यता होती है। डिजिटल पढ़ना ब्रेन के किसी और सेक्शन में जाता है। जबकि हम हार्ड कॉपी पढ़ते हैं तो वह हमारे दिमाग के खास हिस्से में स्टोर होता है। जिससे हमारे दिमाग का विकास भी होता है। कहा कि प्रत्येक युवा को सुबह जल्दी उठने की आदत डालनी चाहिए।
सुबह उठकर अखबार या पुस्तकों का अध्ययन जरूर करें। इससे दिमाग को नई सोच मिलती है। उन्होंने श्रद्धा हत्याकांड का उदाहरण देते हुए छात्राओं को समझाया कि जीवन में जहां अपनी सुरक्षा खतरे में लगे, वहां से तुरंत निकल जाना चाहिए। इस मौके पर विवि के रजिस्ट्रार डॉ. आरपी सिंह, विभागाध्यक्ष डॉ. कृति तिवारी, डॉ. मालविका, डॉ. सरस्वती काला आदि मौजूद रहे।
कर्तव्यों के निर्वहन से भी हो सकती है देश सेवा
महिला उत्थान एवं बाल कल्याण संस्थान की अध्यक्ष अनुकृति गुसाईं ने कहा कि मुझे गर्व है कि मैंने भारत जैसे वीरों की धरती वाले देश में जन्म लिया। हम सभी को भारत का नागरिक होने पर गर्व महसूस करना चाहिए। उन्होंने छात्रों से संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों व कर्तव्यों पर चर्चा की। कहा कि हमें अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों का भी निर्वहन करना चाहिए। कहा कि सिर्फ एक नेता बनकर या सैनिक बनकर ही देश की सेवा में योगदान नहीं दिया जा सकता है। अगर प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का निर्वहन ठीक से करे तो इससे भी राष्ट्र निर्माण में अहम योगदान दिया जा सकता है।
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