देहरादून की रिस्पना, बिंदाल, सौंग, नून सहित विभिन्न नदियों के किनारे आवासीय मानचित्र पास होने लगे हैं।
भू उपयोग आवासीय होने और हाईकोर्ट के फैसला वापस लेने के बाद मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने यह कार्रवाई शुरू कर दी है। अब नदी के किनारे दस मीटर एरिया छोड़कर ही निर्माण किया जा सकेगा।
नैनीताल हाईकोर्ट ने 26 अगस्त को एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए नदियों के 200 मीटर की दूरी तक निर्माण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद एमडीडीए ने राजधानी की नदियों के किनारे आवासीय नक्शे पास करने बंद कर दिए थे। इससे सैकड़ों प्रोजेक्ट लटक गए थे।
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लोग हर रोज प्राधिकरण के चक्कर काटने लगे थे। जबकि एमडीडीए सिंचाई विभाग से नदियों के बारे में जानकारी जुटा रहा था। एमडीडीए वीसी आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि इस बीच शासन की ओर से हाईकोर्ट में एक शपथपत्र दाखिल किया गया, जिसके बाद उक्त फैसले को हाईकोर्ट ने वापस ले लिया है। अब एमडीडीए ने नदियों के किनारे 10 मीटर को छोड़कर मानचित्र पास करना शुरू कर दिया है।
ढाक पट्टी के लिए कवायद शुरू
एमडीडीए ने ढाक पट्टी आवासीय योजना के लिए भी कवायद शुरू कर दी है। यहां किसानों से जमीन खरीदकर करीब 2000 फ्लैट बनाने की योजना है। इस जमीन का भू उपयोग भी सशर्त बदला जा चुका है। एमडीडीए ने इस प्रोजेक्ट को 26 अगस्त को आए फैसले के बाद रोक लिया था, लेकिन अब फिर से कसरत शुरू हो गई है। यह एमडीडीए का पहला मेगा प्रोजेक्ट होगा।
एक अक्तूबर से मिलेंगे फार्म
आईएसबीटी के पास प्रस्तावित मल्टीस्टोरी एमडीडीए फ्लैट के लिए एक अक्तूबर से फार्म मिलने शुरू हो जाएंगे। एमडीडीए वीसी के अनुसार एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक की शाखाओं में फार्म मिलेंगे।
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