देहरादून में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आरक्षण का चौथा चक्र लेना सरकार के लिए परेशानी का सबब बन सकता है।
मंत्री के सामने रखे जाने की तैयारी
जिला पंचायत से जुड़े लोगों की सबसे अधिक आपत्ति इसी बात को लेकर है। इनका कहना है कि चौथा चक्र लेने के कारण आरक्षण की पूरी तस्वीर ही बदल गई है। अब मुख्यमंत्री और पंचायत मंत्री के सामने यह मामला रखे जाने की तैयारी है।
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शासन में मंगलवार से आपत्तियों को स्वीकार किया जाना है और जिला पंचायत से जुड़े लोगों ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर आरक्षण तय करने के लिए सरकार ने इस बार 1996 के जिला पंचायत चुनाव के दौरान हुए सीटों के आरक्षण को आधार माना है।
लोगों की आपत्ति इसी बात को लेकर अधिक है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जोत सिंह बिष्ट के मुताबिक जिला पंचायतों में 1996 में आरक्षण लखनऊ से तय हुआ था। राज्य गठन के बाद जिला पंचायतों में आरक्षण को नए सिरे से तय किए जाने की जरूरत है। पर ऐसा नहीं किया कया।
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जोत सिंह बिष्ट को सोमवार को पंचायत मंत्री प्रीतम सिंह से मिलना था पर यह मुलाकात नहीं हो पाई। लिहाजा इस मुद्दे पर बातचीत नहीं हुई। अब मंगलवार से शासन में आरक्षण पर आपत्तियां स्वीकार की जानी हैं। अनुमान है कि इस मुद्दे पर सबसे अधिक आपत्ति होगी।
2003 के पंचायत चुनाव बने आरक्षण का आधार
शासन का कहना है कि जिला पंचायतों का स्वरूप राज्य गठन से पहले और बाद में एक जैसा ही रहा। लिहाजा जिला पंचायत में आरक्षण का चौथा चक्र लिया गया।
राज्य गठन के बाद 2002 में पंचायतों का व्यापक परिसीमन हुआ था लिहाजा पंचायतों का स्वरूप पूरी तरह से बदल गया था। इस कारण पंचायतों में आरक्षण के लिए आधार 2003 के पंचायत चुनाव को लिया गया।
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