चिंताजनक पहलू
मित्र जीवाणुओं की संख्या कहीं कहीं 15 फीसदी से भी कम दोनों नदियों में मित्र जीवाणुओं का अध्ययन ईफेमेरोपटेरा, प्लेकोपटेरा, ट्राइकोपटेरा (ईपीटी) के मानकों पर किया गया। यदि किसी नदी के जल में ईपीटी इंडेक्स बीस फीसदी पाया जाता है तो इससे साबित होता है कि जल की गुणवत्ता ठीक है। यदि ईपीटी इंडेक्स तीस फीसदी से अधिक है तो इसका मतलब पानी की गुणवत्ता बहुत ही अच्छी है। लेकिन, दोनों नदियों में कई जगहों ईपीटी का इंडेक्स 15 फीसदी से भी कम पाया गया है जो चिंताजनक पहलू है।
इन वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर वीपी उनियाल की देखरेख में डॉ. निखिल सिंह व अन्य ने दोनों नदियों में अलग-अलग स्थानों पर मित्र जीवाणु (माइक्रो इनवर्टिब्रेट्स) की जांच की। नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के तहत वैज्ञानिकों ने अलकनंदा नदी में माणा (बदरीनाथ) से लेकर देवप्रयाग तक और भागीरथी नदी में गोमुख से लेकर देवप्रयाग तक अध्ययन किया। गंगाजल में है ऑक्सीजन सोखने की अद्भुत क्षमता वैज्ञानिकों की माने तो गंगाजल में अन्य नदियों के जल की तुलना में वातावरण से ऑक्सीजन सोखने की क्षमता बहुत अधिक होती है। दूसरी नदियों की तुलना में गंगा में गंदगी को हजम करने की क्षमता 20 गुना अधिक पाई जाती है। 20 गुना अधिक है गंगा में गंदगी हजम करने की क्षमता गंगा की सहायक नदियां भागीरथी, अलकनंदा, महाकाली, करनाली, कोसी, गंडक, सरयू, यमुना, सोन नदी और महानंदा नदियां गंगा की मुख्य सहायक नदियां हैं।
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पाई जाती हैं कई प्रजातियां
गंगा नदी में डॉल्फिन समेत मछलियों को 140, सरीसृपों की 35, स्तनधारी जीवों की 42
प्रजातियां पाई जाती हैं।