गांधी रोड स्थित जैन धर्मशाला में आयोजित पर्वाधीराज पर्युषण महापर्व का ध्वजारोहण कर किया गया शुभ
जब हमारी अपेक्षाओं की उपेक्षा होने लगती है तब क्रोध का आगमन होता है। क्रोध उबलते पानी के समान है, जिसमें व्यक्ति स्वयं का चेहरा नहीं देख पाता। क्रोधी व्यक्ति अपना प्रभाव कहीं नहीं छोड़ पाता। इसलिए जीवन में हमेशा हर पल क्षमा को स्वीकार करना चाहिए। ये बातें मुनि सौरभ सागर महाराज ने पर्वाधीराज पर्युषण महापर्व के शुभारंभ पर कहीं।
वह मंगलवार को गांधी रोड स्थित जैन धर्मशाला में पर्वाधीराज पर्युषण महापर्व के शुभारंभ पर प्रवचन दे रहे थे। महापर्व के शुभारंभ पर जिनेंद्र भगवान को मंडप में विराजमान कर धर्म ध्वजारोहण किया गया। इसके बाद विभिन्न अनुष्ठान शुरू हुए। मुनि सौरभ सागर महाराज ने पर्युषण पर्व के प्रथम दिन धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज क्रोध का त्याग कर क्षमा को हृदय में धारण करने का दिन है। इस अवसर पर हुए अनुष्ठान में सौधर्मेंद्र बनने का सौभाग्य दिल्ली निवासी रविंद्र जैन, धनपति कुबेर बनने का सौभाग्य संदीप जैन बड़ागांव को प्राप्त हुआ।
वहीं, सायंकालीन गुरु भक्ति, श्रावक प्रतिक्रमण, मंगल आरती, शास्त्र प्रवचन किए गए। इसके बाद मनोज शर्मा ने मनमोहक नाटिका ‘देशभूषण कुलभूषण’ प्रस्तुत की। इस मौके पर संदीप जैन, विनोद जैन, अनिल जैन, संजय जैन, ऋ षि जैन, अमित जैन, पूर्णिमा जैन आदि मौजूद रहे।