-25 लाख तक निर्माण कार्यों के लिए ई-टेंडर अनिवार्य नहीं
-टेंडर प्रक्रिया में टर्न ओवर की शर्तों में दी छूट
-वित्त विभाग ने निर्माण कार्यों के लिए अधिप्राप्ति नियमों में संशोधन कर शासनादेश किया जारी
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश सरकार ने विभिन्न विभागों के माध्यम से कराए जाने वाले निर्माण कार्यों के टेंडर प्रक्रिया के मानकों में छोटे ठेकेदारों को राहत दी है। 25 लाख तक निर्माण कार्यों के लिए ई-टेंडर अनिवार्य नहीं होगा। इसके अलावा 1.5 करोड़ से 10 करोड़ तक के निर्माण कार्यों के लिए वार्षिक टर्नओवर को कम कर अनुभव व मुख्य निर्माण कार्यों में छूट दी है।
वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने निर्माण कार्यों के लिए अधिप्राप्ति नियमों में संशोधन के बाद नया शासनादेश जारी किया। लंबे समय से ठेकेदार संघ व विभाग टेंडर मानकों में संशोधन की मांग कर रहे थे। इस पर प्रदेश सरकार ने टेंडर मानकों में संशोधन कर राहत दी है। अब 1.5 करोड़ से 10 करोड़ तक निर्माण कार्य के लिए ठेकेदार का पिछले पांच वर्षों में टर्नओवर टेंडर की अनुमानित लागत का 50 प्रतिशत होना चाहिए। जबकि मुख्य ठेकेदार के रूप में टेंडर लागत का कम से कम 33 प्रतिशत के एक काम का अनुभव जरूरी है। मुख्य निर्माण में पांच वर्ष के किसी एक साल में वार्षिक निर्माण की दर को 80 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत किया गया।
प्रदेश सरकार ने नए शासनादेश में प्राकृतिक आपदा में होने वाले कार्यों के लिए मानक तय किए हैं। टेंडर के लिए ठेकेदार का टर्नओवर पिछले पांच साल में किसी एक साल में टेंडर लागत का 50 प्रतिशत होना चाहिए। इसके अलावा कम से कम एक काम का अनुभव होना चाहिए। 10 करोड़ तक के निर्माण कार्यों के लिए पूर्व में वार्षिक टर्नओवर टेंडर लागत का 200 प्रतिशत होना तय किया गया था। इसे घटा कर अब 100 प्रतिशत किया गया। इसके साथ अब मुख्य ठेकेदार के रूप में टेंडर की लागत के न्यूनतम 50 प्रतिशत लागत का एक कार्य या 33 प्रतिशत के कम से कम दो निर्माण कार्य कराने का अनुभव जरूरी होगा।