रील की दुनिया में व्यस्त हर कोई (सांकेतिक तस्वीर)
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स्क्रीन के शुरुआती 30 सेकेंड में लोगों की जिंदगी उलझ गई है। कुछ और अच्छा दिखेगा, इस चाह में लोग घंटों फोन पर रील्स देखने में लगा रहे हैं। चिकित्सक इसे मेडिकल भाषा में नोमोफोबिया रोग की संज्ञा दे रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार मस्तिष्क को अच्छा महसूस कराने वाले डोपामाइन न्यूरोट्रांसमीटर ने फोन चलाने वाली गतिविधियों को और अधिक बढ़ा दिया है।
डिजिटल सामग्री देखने के बाद मस्तिष्क में मौजूद रिवार्ड सर्किट और सक्रिय हो रहा है। यह बार-बार फोन की स्क्रीन देखने के लिए प्रोत्साहन दे रहा है। दून अस्पताल के मनोरोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. जया नवानी बताती हैं कि डोपामाइन हार्मोन शरीर में संदेशवाहक के रूप में काम करता है। यह सिर्फ मन को खुशी देने वाले ही संदेशों का संचरण करता है।
ध्यान लगाने की क्षमता घट रही
चिकित्सक के मुताबिक ऐसी स्थिति में ब्रेन का रिवार्ड सर्किट का स्तर बढ़कर सामान्य से काफी अधिक हो जाता है। रिवार्ड सर्किट के तीन मुख्य प्रकार होते हैं, जो ब्रेन में अलग-अलग तरीके से काम करते हैं। इसमें मुख्य रूप से डोपामाइनर्जिक, सेरोटोनर्जिक और ओपिओइड सर्किट शामिल हैं।
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तीनों प्रकार के रिवार्ड सर्किट ऐसी स्थिति में अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं। काफी समय तक इसकी पुनरावृत्ति से लोगों में एकाग्रता और ध्यान लगाने की क्षमता घट रही है। इसके अलावा लोगों में आक्रामकता बढ़ी है। चिकित्सक के मुताबिक ओपीडी में हर रोज इस तरह के लक्षण वाले मरीज आते हैं। जब उनकी काउंसलिंग की जाती है तो पता चलता है कि उनको घंटों तक स्क्रीन देखने की लत है।