रिजल्ट घोषित करने पर लगाई थी रोक
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता चंद्रशेखर रावत ने कोर्ट को बताया कि एनसीटीई ने एससी-एसटी और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को पांच प्रतिशत की छूट देने के लिए गाइड लाइन जारी की है। इसके आधार पर राज्य सरकार ने उनको छूट देने का निर्णय लिया है जिस पर कोर्ट ने इससे सहमति जताई। न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हाईकोर्ट में इस संबंध में दायर याचिकाओं में कहा गया था कि राज्य के प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद के लिए एनसीटीई व राज्य सरकार ने बीएड और स्नातक में 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता रखी है जो सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेशों के विपरीत है, फिर भी राज्य सरकार ने मार्च 2019 में सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में यह नियम लागू किया। पूर्व में हाईकोर्ट ने भी 50 प्रतिशत से कम अंक अर्जित करने वाले लाभार्थियों को परीक्षा में शामिल करने के आदेश दिए थे लेकिन रिजल्ट घोषित करने पर रोक लगाई थी। यह रोक कोर्ट ने हटा ली।