गड़बड़ियां चलती रही लेकिन कार्रवाई नहीं
इस गड़बड़ी के बाद तत्कालीन अध्यक्ष आरबीएस रावत ने इस्तीफा दिया। जो छह महीने तक स्वीकार नहीं हुआ। इस दौरान वे लगातार भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रहे। गड़बड़ी पाए जाने के बावजूद आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। लगातार धांधली चलती रही। इस मामले में सवाल ये है कि क्यों अध्यक्ष का इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ? जब उन्होंने इस्तीफा दे दिया, तो क्यों वे लगातार भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रहे? सवाल यह भी है कि जिस पेपर लीक की दागी आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशन कंपनी का करार 2019 में खत्म हो गया था, उससे आयोग लगातार भर्तियों के पेपर छपवाता रहा। सवाल यह भी है कि रुड़की में सरकारी प्रेस होने के बावजूद निजी प्रेस से पेपर क्यों छपवाए गए। दागी कंपनी को प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों में किस आधार पर काम दिया गया।
धामी की सख्ती के बाद खुलती चली गई घोटाले की परतें
2016 से शुरू हुआ घपला, 2022 में सीएम पुष्कर सिंह धामी की सख्ती के बाद बंद हुआ। 2016 में कांग्रेस की सरकार के बाद 2017 से त्रिवेंद्र सरकार आई लेकिन भर्ती घोटाले के सिंडिकेट पर हाथ डालने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। इस साल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बाद जब शिकायत पहुंची तो उन्होंने इसकी गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ से जांच कराई। धीरे-धीरे परतें खुली और अब तक 41 आरोपी सलाखों के पीछे जा चुके हैं। यूपी से लेकर उत्तराखंड तक फैला नकल माफियाओं का नेटवर्क भी धामी सरकार ने ध्वस्त कर दिया।
2020 में बच निकला था हाकम सिंह
2020 में हरिद्वार जिले में फॉरेस्ट गार्ड भर्ती परीक्षा में ब्लूटूथ से नकल मामले में हाकम सिंह रावत बच निकला था। मंगलौर थाने में आलोक की शिकायत पर मुकदमा दर्ज हुआ था। हाकम सिंह, मुकेश सैनी, कुलदीप राठी, गुरुबचन, पंकज समेत कई आरोपी बने। लेकिन इनमें से किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। न ही पुलिस ने कोई एफआर लगाई गई। माना जा रहा है कि उसी दौरान यदि इस सिंडिकेट को दबोच लिया गया होता, तो राज्य के युवाओं के साथ इस तरह कोई छलावा नहीं होता।
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सीएम बोले, अंतिम आरोपी के पकड़े जाने तक जांच जारी रहेगी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई पूरी सख्ती के साथ की जा रही है। चार्जशीट दाखिल करने की कार्रवाई की गई है। मैंने पहले भी कहा है कि जब तक अंतिम आरोपी नहीं पकड़ा जाएगा, तब तक जांच चलेगी। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा में घपले घोटाले के काम चलता रहा है। कुछ बेरोजगार छात्रों ने मुझे जैसे अवगत कराया, तो हमने यह प्रयास किया कि लंबे समय से जो यह सब चल रहा है, उसको रुकना चाहिए। वह रुका है। अभी तक 41 लोगों की गिरफ्तारियां इसमें हो चुकी है।