जून 2013 में आई आपदा से प्रभावित लोगों को सरकार से मिलने वाली आर्थिक सहायता धनराशि के वितरण में लेखपालों ने बड़े स्तर पर गोलमाल किया है।
आपदा राहत में किया घपला
लेखपाल प्रवीण कुमार त्यागी पर आरोप है कि उन्होंने कई ऐसे लोगों आठ-आठ हजार रुपये सहायता राशि दी, जिनका आपदा से नुकसान हुआ ही नहीं था। इतना ही नहीं लेखपाल ने एक मृतक व्यक्ति को भी आठ हजार रुपये की सहायता राशि दी।
‘अमर उजाला’ में जब सहायता वितरण में गोलमाल होने की खबर प्रकाशित हुई। देवपुरा स्थित पटियाला बैंक वाली गली के कुछ लोगों ने शिकायत की कि पार्षद के कहने पर तीन मंजिल पर रहने वाले व्यक्ति तक को सहायता राशि दी गई।
सही मिली शिकायत
तत्कालीन एसडीएम ने मामले की जांच कराई तो शिकायत सही पाई गई। फंसता देख लेखपाल ने पांच व्यक्तियों से आठ-आठ हजार रुपये वापस लेकर तहसीलदार के खाते में 40 हजार रुपये जमा करा दिए।
इनमें से एक की मौत तीन साल पूर्व हो चुकी है। लेकिन, तहसील प्रशासन ने यह जानने की जहमत नहीं उठाई कि मृतक व्यक्ति के नाम से आठ हजार रुपये किसने लिए और फिर वापस किसने दिए।
लापरवाही की हद तो तब हो गई है जब अधिकारियों ने धोखाधड़ी का मुकदमा तक दर्ज नहीं कराया है।
आयोग ने डीएम को भेजा प्रकरण
उत्तराखंड सूचना आयोग ने आपदा प्रभावितों को सहायता राशि के वितरण में भ्रष्टाचार व अनियमितता का मामले को संज्ञान लेने और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई का निर्णय लेने के लिए डीएम को भेजा है।
आरटीआई के तहत मांगी सूचना में तहसील के लोक सूचना अधिकारी और विभागीय अपीलीय अधिकारी ने पांच व्यक्तियों को बिना किसी क्षति के सहायता राशि दिया जाना बताया।
लेखपाल के विरूद्ध कार्रवाई की सिफारिश
27 जनवरी को सूचना आयुक्त अनिल कुमार शर्मा के समक्ष तहसीलदार एवं विभागीय अपीलीय अधिकारी दिनेश मोहन उनियाल ने प्रभारी तहसीलदार धनप्रकाश शर्मा की 16 सितंबर को डीएम को भेजी रिपोर्ट प्रस्तुत की। जिसमें लेखपाल प्रवीण त्यागी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की हैं।