कांग्रेस के नौ बागियों ने थामा भाजपा का हाथ।
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बागियों के भाजपा में शामिल होने से उनकी सुप्रीम कोर्ट में दल बदल कानून के तहत उनको बर्खास्त करने की याचिका पर प्रभावित होगी। बागियों के इस कदम से कांग्रेस के पास मार्च 18 को उनकी भाजपा के साथ गठजोड़ साबित करने का मजबूत आधार है। विशेषज्ञ के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में अब उनकी याचिका खारिज हो सकती है। भाजपा में शामिल होने के बाद बागी खुद भी यह हलफनामा दाखिल कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में बागियों की दल बदल कानून के तहत उनकी बर्खास्तगी की याचिका पर जुलाई में सुनवाई होनी है। हाईकोर्ट तक बागी इस बात की दलील देते रहे कि वह कांग्रेस के सदस्य हैं और उन्होंने कांग्रेस छोड़ी ही नहीं। इसी को आधार बनाकर अपनी विधानसभा सदस्यता की पैरवी करने वाले बागियों के लिए अब समीकरण बदल गए हैं।
नियम के चलते मुश्किल
उन्होंने अपने पसंद से भाजपा को ज्वाइन किया है, जिससे शिड्यूल 10 में निहित प्रावधान उनके कांग्रेस विधायक होने के दावे को खारिज कर रहे हैं। कांग्रेस के पास न केवल अदालत बल्कि सियासी मंच पर भी बागियों के भाजपा ज्वाइन करने का फायदा मिलेगा।
कांग्रेस अब यह साबित करने में जुटेगी कि बागियों की बगावत का कारण हरीश रावत नहीं है बल्कि उनके निजी स्वार्थ हैं। कांग्रेस को अब केंद्र को घेरने का सीधा मुद्दा भी मिल गया है कि मार्च 18 को जो सियासी घटनाक्रम हुआ था उसके पीछे केंद्र का हाथ था। वहीं भाजपा को बागियों से होने वाले फायदे के साथ चुनावों में खुद को इस छवि से बाहर निकालने का प्रबंधन करना होगा।