मात्र एक अंक की कमी आईआईटी रुड़की के छात्र तनाजीराव को मौत के दरवाजे पर ले आई। मेडिकल प्रवेश परीक्षा में एक अंक की कमी से नासिक में प्रवेश नहीं मिला।
पढ़ें, IIT रुड़की में छात्र की आत्महत्या से हड़कंप
किसान परिवार चार लाख रुपए डोनेशन देने के पक्ष में नहीं था। लिहाजा तनाजीराव को पुणे स्थित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश लेना पड़ाहमेशा से टॉपर रहे तनाजीराव एमटेक के लिए आईआईटी तक आ पहुंचा।
पढ़ें, रेल बजट: कुमाऊं को सौगात, गढ़वाल खाली हाथ
लेकिन इस एक अंक की कमी के चलते डॉक्टरी के सपने को पूरा नहीं कर पाने के गम ने यहां भी पीछा नहीं छोड़ा।
छह साल पहले का सपना पड़ा भारी
आईआईटी जैसे संस्थान में एमटेक की पढ़ाई करने के बावजूद तनाजीराव पर छह साल पूर्व का सपना भारी पड़ा और उसने मौत को गले लगाया।
पढ़ें, एक अप्रैल से उत्तराखंड में जांच और इलाज मिलेगा मुफ्त
पिता के साथ पहुंचे मृतक के चचेरे भाई से की गई बातचीत और पुलिस को मिले सुसाइड नोट से साफ हो रहा है कि तनाजीराव को अभी भी डॉक्टर न बनने का मलाल था।
पढ़ें, गांव की तस्वीर बदलने चला आईटी इंजीनियर
चचेरे भाई ने बताया कि इस बात को लेकर वह अक्सर अफसोस जताता था। दरअसल, इंटरमीडिएट के बाद तनाजीराव ने इंजीनियरिंग और मेडिकल के लिए एंट्रेंस दिया था।
पिता के गले नहीं उतर रही आत्महत्या की बात
बेटे का शव लेने पहुंचे बदहवास पिता तनाजी पंडेरीनाथ बिरादर के गले आत्महत्या की बात नहीं उतर रही। उन्होंने कहा कि मैं किसान हूं। चादर से फंदा लगाकर फांसी कैसे लगाई जा सकती है।
पढ़ें, IIT रुड़की में छात्र की आत्महत्या से हड़कंप
उन्होंने सिविल अस्पताल में मोर्चरी के बाहर आईआईटी के अधिकारियों को भी नसीहत दी। गहरे सदमे में पिता ने इतना ही कहा कि अब हमारा तो बेटा गया लेकिन आपके संस्थान से भी एक होनहार चला गया।
पढ़ें, रेल बजट: कुमाऊं को सौगात, गढ़वाल खाली हाथ
उन्होंने अधिकारियों से पूरे मामले की जांच करने के साथ ही छात्र के डीन से वार्ता कराने की भी गुजारिश की। इस दौरान सुरक्षा अधिकारी केपी सिंह, डीन वार्डन डॉ. इंद्रदीप, चीफ वार्डन डॉ. पार्थ राय, डीन अनुशासन डॉ. जीवानंदन मौजूद थे।
नौ की रात को की थी आखिरी बात
पिता ने नौ फरवरी की रात को अपने बेटे से आखिरी बात की थी। उन्होंने कहा कि उन्हें पता भी नहीं था कि अब वह अपने बेटे से कभी बात भी नहीं कर पाएंगे।
पढ़ें, दूसरों की अंगुली थाम बदली आदिवासी महिलाओं की जिंदगी
उन्होंने बताया कि बात करते समय उनका बेटा किसी भी तनाव में नहीं था। बल्कि एक दिन पूर्व ही घर से उसके एकाउंट में पैसे भी भेजे थे।
सिविल अस्पताल से ले गए बेटे का शव
मृतक छात्र के पिता के साथ उसके परिवार के कुछ लोग भी आए थे। देर शाम करीब छह बजे सीधे अस्पताल पहुंचे।
पढ़ें, एक अप्रैल से उत्तराखंड में जांच और इलाज मिलेगा मुफ्त
जहां से औपचारिकता पूरी करने के बाद शव को लेकर महाराष्ट्र के लातूर जिला स्थित अपने गांव लौट गए।