भले ही सरकार ने क्लीन चिट दे दी हो, लेकिन राज ट्रांसपोर्ट कंपनी से आपदा प्रभावित जिलों के लिए बनवाए गए फूड पैकेट को लेकर शोर मचना शुरु हो गया है।
डॉक्यूमेंटरी प्रूफ को भाजपा सितम्बर माह में होने वाले विधानसभा सत्र में उठाएगी। यह मुद्दा पूरी तरह से इस बार सत्र में हंगामे का सबब बनेगा।
आपदा प्रभावित जिलों के लिए एक ट्रांसपोर्ट कंपनी से तैयार कराकर भेजे गए फूड पैकेट को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच रार शुरू हो गई है। विपक्ष के कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब सरकार के पास नहीं है।
फूड पैकेट का काम ट्रांसपोर्ट कंपनी से क्यों कराया गया और इतनी बड़ी धनराशि के पैकेट बगैर टेंडर प्रक्रिया के तैयार कराए गए। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने कहा कि यह मुद्दा अगले महीने सितम्बर माह में होने वाले विधानसभा के सत्र में रखा जाएगा।
चीफ सेक्रेटरी का यह बयान की मूल्य मुख्यमंत्री ने तय किया है, और भी ज्यादा शर्मनाक है। क्योंकि एक नियमावली के तहत सब कुछ होता है, मुख्यमंत्री कुछ तय नहीं करते।
सरकार की सफाई के बाद फिलहाल विपक्ष के हाथ में सरकार के खिलाफ यह ठोस मुद्दा है। कोटेशन प्रक्रिया में भी यह कंपनी शामिल नहीं थी और कोटेशन में शामिल एक कंपनी के फेल होने पर अन्य को मौका क्यों नहीं दिया गया यह एक बड़ा सवाल है।
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