रणवीर एनकाउंटर के दोषी पुलिसकमिर्यों के साथ ही उन बेकसूर लोगों को भी उम्र 'कैद' मिली है।
वर्दी की हनक परिजनों के लिए बन गई उम्रकैद
वर्दी के हनक में हुई एक गलती ने उनके परिजनों को पूरी उम्र गम, आंसू और चिंताओं की कैद दे दी है।
सीबीआई की विशेष अदालत ने पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराने के बाद सजा के लिए अगली तारीख तय की तो परिजनों को उम्मीद थी कि शायद कुछ राहत मिल जाए।
लेकिन सोमवार को उनकी आस की आखिरी किरण भी धुंधला गई। दिनभर टीवी पर गड़ी रही नजरें अपनों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाते ही बहने लगीं। कई परिवार ऐसे हैं, जहां दोषी ही कमाई का जरिया थे।
टूट चुके परिवारों की नींद और चैन गायब है। आगे का जीवन कैसे और किसके सहारे गुजरेगा यह सवाल उनके लिए पहाड़ जैसा हो गया है।
रातभर नहीं आई नींद
सजायाफ्ता चालक चंद्रभान की पत्नी पति की सजा पर आहत हैं। बताया कि रविवार रातभर सो नहीं सकी। कहा कि पुलिस टीम जहां भी जाए वहां जाना चालक की ड्यूटी है।
उनके पति ने अपनी ड्यूटी निभाई। नहीं जाते तो उन पर कार्रवाई की जाती। कहा कि मुठभेड़ से मेरे पति का कोई लेना-देना नहीं था, फिर भी फंसा दिया गया।
कहती हैं कि उम्रकैद का फैसला परिवार पर पहाड़ की तरह टूटा है, लेकिन वह आगे लड़ाई लड़ने के लिए तैयार हैं। चंद्रभान के दो बेटे कक्षा आठ और छह में पढ़ रहे हैं। बताया कि पति को दोषी करार दिए जाने के बाद से घर में चूल्हा नहीं जला है।
जुबां खामोश, बोल गईं आंखें
सिपाही सौरभ नौटियाल परिवार के एकमात्र पुरुष सदस्य हैं। उनकी गिरफ्तारी के कुछ समय बाद ही उनके पिता और बड़े भाई का निधन हो गया था।
परिवार में मां लता नौटियाल, पत्नी नेहा, बेटी सोबिया और भाभी हैं। सोमवार को अमर उजाला सौरभ के घर पहुंचा तो दरवाजा खटखटाने पर एक महिला बाहर निकली।
सजा पर प्रतिक्रिया पूछी तो वह कुछ बोली नहीं, लेकिन उनकी आंखों का सूनापन बता गया कि इस परिवार को अब वर्षों तक इस सजा का दर्द सालता रहेगा।
सौरभ की मां लता ने दो दिन पूर्व डीजीपी बीएस सिद्धू से मिलकर बेटे को बेकसूर बता रिहाई के लिए कार्रवाई की मांग की थी।