फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रामपुर तिराहा कांड: सूरज को पाने की चाहत में लड़े थे, एक कतरा धूप के लिए तरस गए

Wed, 02 Oct 2019 11:44 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं राज्य आंदोलनकारी
  • राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद लंबे समय से निष्क्रिय, नहीं हुई नियुक्तियां
विज्ञापन
ravindra jugran
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सूरज को पाने की चाहत में लड़े थे, एक कतरा धूप के लिए तरस गए। कुछ ऐसी ही है, राज्य आंदोलन में लड़े आंदोलनकारियों की कहानी। नौ नवंबर 2000 को यह लड़ाई रंग भी लाई, लेकिन उसके बाद सम्मान की लड़ाई आज भी जारी है। राज्य गठन के कुछ समय बाद से ही प्रदेश में राज्य आंदोलनकारी अपने हक की आवाज उठा रहे हैं। प्रदेश में सरकार चाहे भाजपा की रही हो या कांग्रेस की। राज्य आंदोलनकारी चाहे भाजपा से जुड़े रहे हों या कांग्रेस से। हर स्तर पर हर सरकार से इन्हें असंतोष ही मिला।

विज्ञापन


सरकारें भी इनसे असंतुष्ट रहीं। इन्हें सम्मान का अधिकार दिलाने के लिए गठित की गई राज्य आंदोलन सम्मान परिषद का पद भी धीरे से दायित्व के पद में बदल गया। इस पद पर किसी को बिठाने का मतलब हुआ कि वह सरकार के नजदीकी लोगों में शामिल है और उसे फायदा मिलेगा। इतना होने पर भी परिषद और सरकार के बीच खटपट जारी रही। वर्तमान सरकार के कार्यकाल में यह पद खाली है। सम्मान परिषद की लड़ाई का एक सबब यह हुआ कि प्रदेश में करीब 15 हजार राज्य आंदोलनकारी चिह्नित किए गए। इनको सम्मान राशि या पेंशन भी मिल रही है। 

...और अब, एक तीखी चिठ्ठी
राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता रविंद्र जुगरान ने मुख्यमंत्री को तीखी चिठ्ठी लिखी है। जुगरान ने लिखा है कि हर साल दो अक्तूबर को रामपुर तिराहे पर शहीदों के स्मारक पर माल्यार्पण की रस्म निभाई जाती रही है। रामपुर में नरसंहार उत्तराखंड राज्य गठन के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। प्रदेश में, उत्तर प्रदेश में और केंद्र में भी भाजपा की सरकारें हैं। फिर भी मुजफ्फरनगर कांड के एक भी दोषी को आज तक सजा नहीं मिली। इसके लिए एक नहीं, अब तक की विधायिकाएं, जनप्रतिनिधि सभी दोषी हैं। जुगरान ने मुख्यमंत्री से इसके लिए दो दर्जन से अधिक सवाल किए हैं। 
विज्ञापन


रविंद्र जुगरान के सवाल
-25 साल हो गए, दोषियों को सजा दिलाने के लिए एक भी विधायिका ने पहल नहीं की, क्यों?
-आप लोग उत्तराखंड के सच्चे, निष्ठावान प्रतिनिधि कैसे हो सकते हैं?
-कभी यह जानने की कोशिश की गई कि 25 साल से अदालत में जो केस चल रहा है, उसकी स्थिति क्या है?
-राज्य गठन के बाद पहली सरकार का संकल्प दोषियों को सजा दिलाने और उसके बाद की सरकारों का काम उस संकल्प के पूरा न होने तक दोहराने का होना चाहिए था, ऐसा क्यों नहीं हुआ? 
 

विज्ञापन

कब क्या हुआ...

2003-2007: तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद का गठन किया और परिषद में धीरेंद्र प्रताप और ऊषा नेगी को उपाध्यक्ष बनाया। परिषद को दायित्व दिया गया कि वह आंदोलनकारियों को चिह्नित करें और उनकी समस्याओं को सरकार के सामने रखें। परिषद का मुख्य दायित्व राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान के तरीकों को खोजना था।

2007-2012: राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद में अध्यक्ष का पद दायित्व का पद बन गया। भुवन चंद्र खंडूड़ी के मुख्यमंत्री रहते हुए परिषद की अध्यक्ष सुशीला बलूनी बनीं। भाजपा सरकार में नेतृत्व परिवर्तन हुआ तो परिषद में भी बदलाव हो गया। सुशीला बलूनी को महिला आयोग का अध्यक्ष बनाया गया और रविंद्र जुगरान परिषद के अध्यक्ष बने। तत्कालीन मुख्यमंत्री की नाराजगी का ही शायद सबब था कि रविंद्र जुगरान एक साल ही इस पद पर रहे और ऊषा रावत को अध्यक्ष बना दिया गया।

2012-2017: कांग्रेस की सरकार आई तो धीरेंद्र प्रताप परिषद के अध्यक्ष बने। धीरेंद्र प्रताप ने राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नित करने का मामला उठाया। कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन हुआ और हरीश रावत की नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार विधानसभा में राज्य आंदोलनकारियों के लिए सरकारी सेवा में आरक्षण का विधेयक लेकर आई। यह विधेयक राजभवन में अब भी लंबित है। धीरेंद्र प्रताप ने पद से इस्तीफा दिया।

2017: अब तक-परिषद के अध्यक्ष पद की कुर्सी खाली है। 

मुख्यमंत्री ने कहा, धीरेंद्र जी, प्रदेश में आंदोलनकारी कौन नहीं हैं। जो भी सरकार रही हो, राज्य आंदोलनकारियों को लेकर सबका उपेक्षापूर्ण रवैया ही रहा। 
-धीरेंद्र प्रताप, पूर्व अध्यक्ष राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद

यह समझने में भूल की गई कि सम्मान राज्य आंदोलनकारियों का नहीं, राज्य आंदोलन का होना है। सम्मान की लड़ाई को प्रदेश में रोजगार और लाभ पाने की लड़ाई के रूप में देखा गया। यह भुला दिया गया कि राज्य आंदोलनकारियों ने बहुत कुछ दाव पर लगाया था।
-रविंद्र जुगरान, पूर्व अध्यक्ष राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद  

राज्य आंदोलन के शहीदों के सपनों के अनुरूप होगा विकास : मुख्यमंत्री 
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीदों का भावपूर्ण स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुजफ्फरनगर कांड (रामपुर तिराहा) की बरसी पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अमर शहीदों की कुर्बानियों को सदैव याद रखा जाएगा। उनके सपनों के अनुरूप उत्तराखंड का विकास होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड राज्य को देश का आदर्श राज्य बनाने के लिए हम सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा। ताकि हम राज्य आंदोलन के शहीदों के सपनों के अनुरूप प्रदेश का चहुंमुखी विकास कर सकें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राज्य आंदोलनकारियों के कल्याण के लिए वचनबद्ध है। मुख्यमंत्री बुधवार दो अक्तूबर को सुबह 9.30 बजे कचहरी स्थित शहीद स्मारक में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे, तत्पश्चात पूर्वाहन 11.00 बजे रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर स्थित शहीद स्मारक जाएंगे। जहां वे उत्तराखंड निर्माण के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें : https://www.facebook.com/AuNewsDehradun/
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें