बाबा रामदेव ने भारत सरकार का सम्मान पद्म विभूषण लेने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि एक संन्यासी को अपने संन्यास धर्म के साथ-साथ राष्ट्र धर्म और सेवा धर्म को निभाना चाहिए। संन्यासी के लिए तिरस्कार एवं सत्कार दोनों से ही दूर रहना बेहतर है।
बाबा रामदेव ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को लिखे पत्र में कहा है कि उन्हें पद्म विभूषण मिलने की जानकारी टीवी चैनलों और समाचार पत्रों से हुई है। केंद्र की सद्भावना के प्रति वे कृतज्ञ हैं।
गीता ‘समत्वं योग उच्चयते’ मंत्र का हवाला देते हुए बाबा ने लिखा है कि संन्यासी को सत्कार और तिरस्कार दोनों ही अवस्थाओं में सामान्य रहना चाहिए। बाबा ने यह सम्मान उन्हें न देने का निवेदन केंद्र सरकार से किया है। बाबा के इस निर्णय पर सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।