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रहमतों का मौसम शुरु, रमजानुल मुबारक

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खुश आमदीद रमजानुल मुबारक। परवरदिगार की रहमतों के दरवाजे खुल गए और शैतान कैद हो गया। पहला रोजा सोमवार को है।
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रविवार शाम बादलों की लुका-छिपी के बीच रमजान का चांद नजर आया। मसजिदों और घरों में तराबीह की नमाज शुरू हो गई। इसके साथ ही रहमतों का अशरा (भाग) शुरू हो गया।

नायब शहर काजी मौलाना अशरफ हुसैन कादरी ने बताया कि रमजान में तीन अशरे होते हैं।

पूरे जिस्म और दिलो-दिमाग का रोजा

पहला अशरा रहमतों का, दूसरा अशरा मगफरत (गुनाहों से माफी) और तीसरा अशरा दोजख से छुटकारे का होता है। लोगों को इस महीने का सम्मान करना चाहिए।

जो लोग किसी वजह से रोजा नहीं रख पाते हैं, वे रोजेदारों का एहतिराम करें। दिन में सरेआम बीड़ी-सिगरेट न पिएं।

उन्होंने बताया कि सिर्फ भूखे रहना ही रोजा नहीं है। रोजा पूरे जिस्म और दिलो-दिमाग का होता है।

परवरदिगार की रहमतें बेशुमार
लोग गंदे ख्याल जेहन में न लाएं। किसी का बुरा न करें और न बुरा सोचें। सारा ध्यान अपने रब की इबादत में लगाएं। परवरदिगार की रहमतें बेशुमार हैं।

परवरदिगार अपने फरमाबरदार बंदों से मोहब्बत करता है और उन्हें नवाज देता है। रविवार शाम बहुत से लोगों ने अपने घरों में 10 दिन की तराबीह का आयोजन किया है।

यहां 10 दिन में पूरे कुरान पाक का पाठ हो जाएगा।
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एक नजर में रमजान

- रमजान अरबी कलंडर का नवां महीना है
- इस महीने में कुरान पाक नाजिल (प्रकट) हुआ
- रमजान के 30 दिन रोजों की शुरुआत वर्ष 610 से हुई
- रमजान के रोजे हिजरत के दूसरे साल से शुरू हुए

बाजारों में चहल-पहल बढ़ी
रमजान की आमद पर इनामुल्लाह बि‌ल्डिंग, कारगी चौक, माजरा के बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई। मगरिब (सूर्यास्त) की नमाज के पहले लोग सहरी और इफ्तार का सामान खरीदने के लिए बाजार पहुंचे। बाजारों में सूतफैनी की दुकानें सज गईं।  

रमजान इफ्तार और सहरी
पहला रोजा (सोमवार)
इफ्तार
सुन्नी-7:25 बजे
शिया-7:33 बजे

दूसरा रोजा (मंगलवार)
सहरी
सुन्नी-3:41 बजे
शिया:3:34 बजे
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