तीन दिन तक वहीं फंसे रहे
डॉ. गुलाब बताते हैं कि कार सेवकों ने अंदर घुसकर विवादित ढांचे को गिरा दिया था। इस दौरान कई कार सेवक घायल भी हो गए थे, जिन्हें एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद तो उस क्षेत्र में सिर्फ एंबुलेंस और पुलिस की गाड़ी के सायरन सुनाई दे रहे थे। उन्होंने बताया कि वहां से वह अन्य कार सेवकों के साथ ईंट लेकर निकले। उस दिन पूरे अयोध्या क्षेत्र में कहीं भी खाने के लिए कुछ नहीं मिला। जैसे-तैसे दारुलसभा पहुंचे और कैंटीन में भोजन के लिए पूछा। लेकिन वहां भी सिर्फ पका हुआ चावल था। उसके साथ दाल, सब्जी तो दूर नमक भी नहीं था। इसके बाद हम लोगों ने आधा-आधा प्लेट पका चावल खाया। अयोध्या सहित अन्य क्षेत्रों में कर्फ्यू के कारण वह तीन दिन तक वहीं फंसे रहे।
प्रतीकात्मक कारसेवक दिया था नाम
डाॅ. राणा बताते हैं कि अयोध्या में विवादित ढांचे को गिराने वाले कारसेवकों को प्रतीकात्मक कारसेवक नाम दिया गया था। इस दौरान आंध्र प्रदेश के कार सेवकों को सबसे पहले भेजा गया था। इसके बाद अन्य राज्यों से पहुंचे कारसेवक गए थे।
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निमंत्रण नहीं मिलने पर जताई नाराजगी
कार सेवक डाॅ. गुलाब सिंह राणा का कहना है कि वह प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बेहद उत्साहित थे, लेकिन उन्हें 22 जनवरी के आयोजन का निमंत्रण नहीं मिला है। इससे वह थोड़े निराश हैं, लेकिन उन्हें खुशी है कि आराध्य श्रीराम अपने मंदिर में विराजमान हो रहे हैं।