अल्मोड़ा की जेल में किया गया बंद
पुलिस हमारे घरों को जाती और धमकाती कि उन्हें बोल दें कि गिरफ्तार हो जाएं, अन्यथा ठीक नहीं होगा। एक हमारी टोली हल्दूचौड़ की ओर जा रही थी। पर्वतीय मोहल्ले से निकलकर जब हम बरेली रोड पर पहुंचे तो वहां हमें सीओ ने रोक दिया। हमने दूसरे रास्तों से निकलने की कोशिश की, लेकिन हर तरफ पुलिस तैनात थी। हम गिरफ्तार हो चुके थे। हमें अल्मोड़ा की जेल में बंद कर दिया गया।
जेल में मैं पूरे 23 दिन बंद रहा। हमने जेल के भीतर ही शाखा लगानी शुरू की। शुरुआत में जेलर और पुलिस स्टॉफ शाखा लगाने को लेकर असहज था, लेकिन बाद में वे भी हमारी भावनाओं का सम्मान करने लगे। हम हैरान हो जाते जब जेलर हमें सहयोग करते। नहाने के लिए गर्म पानी मिल जाता। जब बाहर से खाने की इच्छा होती तो इसे भी पूरे कर दिया जाता। राम भक्ति दोनों ओर थी।
पुलिस अपने कर्तव्य से बंधी थी। वह दिन भी आया जब हमें अयोध्या जाने का अवसर मिला, लेकिन हम वहां के लिए निकले ही थे कि कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। हम दूसरे चरण में अयोध्या गए। वहां पहुंचकर लाखों राम भक्तों की ऊर्जा ने हमें उत्तेजना से भर दिया।
ये भी पढ़ें...Uttarakhand: पहले राम के काम फिर यूसीसी का इंतजाम...देवभूमि के वातावरण को राम मय बनाने के लिए ऐसी है तैयारी
मुझे नहीं मालूम कि कब मैं भी गुंबदों में चढ़ गया। वह संघर्ष, पुलिस से धक्का-मुक्की, लाठीचार्ज और न जाने क्या-क्या घटनाओं के हम साक्षी हैं। यह हमारे लिए गौरव की बात है कि हमने जो सपना देखा था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वह साकार होने जा रहा है।
(बंशीधर भगत, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री)