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मनोरमा ने गोद लिया गैरसैंण का लामबगड़ गांव

Mon, 15 Dec 2014 02:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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गैरसैंण ब्लॉक का एक गांव लामबगड़ ऐसा भी है जहां आधा हिस्सा रात को या तो दीये की लौ के भरोसे रहता है या फिर अंधेरे में डूब जाता है। बिना बिजली के इस गांव को उत्तराखंड की राज्यसभा सांसद मनोरमा शर्मा ने गोद लिया है।
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राज्यसभा में सांसद चुने जाने के बाद पहली बार मीडिया से मुखातिब मनोरमा शर्मा ने कहा कि किसी एक गांव को गोद लेने का मतलब यह कतई नहीं है कि अन्य गांवों की अनदेखी होगी। पर सीमित संसाधनों को देखते हुए एक गांव पर फोकस करने की रणनीति कारगर साबित हो सकती है।

ऐसे में उन्होंने गैरसैंण के लामबगड़ गांव को गोद लिया। यह उस लामबगड़ से अलग है जो बदरीनाथ रूट पर पांडुकेश्वर के पास स्थित है। गैरसैंण का गांव लामबगड़ दो अलग-अलग गांवों से मिलकर बना है।
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करीब दो हजार की आबादी वाले इस गांव तक पहुंचने के लिए कच्ची सड़क है, वहीं गांव की खेती को जंगली जानवर पनपने ही नहीं देते। रही-सही कसर ओलावृष्टि पूरी कर देती है। ऐसे में गांव अब पलायन के कगार पर है।

मनोरमा के मुताबिक गैरसैंण की पट्टी खनसर के इस गांव से 2011-12 में वे पहली बार संपर्क में आईं थीं और तब से लगातार उनका गांव वालों से संपर्क बना हुआ है। खुद उनका गांव पौड़ी जिले में सतपुली के नजदीक है।
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यूपी से बंटवारे का मुद्दा उठाएंगी मनोरमा

मनोरमा शर्मा का कहना है कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे का मुद्दा राज्यसभा में उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मामला इतना पेचीदा है कि सिर्फ राज्य सरकार अपने बूते इसमें ज्यादा कुछ नहीं कर पाएगी, इस मामले को केंद्र के स्तर से भी हल करने की कोशिश होनी चाहिए।

उन्होंने कैलास मानसरोवर रूट उत्तराखंड से अलग खोले जाने का भी विरोध किया। कहा कि उत्तराखंड का रूट परंपरागत है और सदियों से इस्तेमाल होता आया है। ऐसे में इस रूट को बंद करना उत्तराखंड के लोगों को ही नहीं यहां की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाने वाला होगा।

हाल ही में राज्यसभा में उन्होंने इस मुद्दे को उठाया भी था। सांसद के मुताबिक राज्य सभा में उनकी ओर से जामरानी बांध, पंचेश्वर बांध के मुद्दों को भी उठाने की कोशिश होगी।

उन्होंने कहा कि भाजपा अपर हाउस में भी नकारात्मक सोच को लेकर आती दिख रही है। ऐसा लगता है कि भाजपा की कोशिश सिर्फ सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की ही है।
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