अनिल बलूनी को नजदीक से जानने वाले जागर सम्राट पद्मश्री प्रीतम भरतवाण कहते हैं कि वे अपने समकक्ष जनप्रतिनिधियों के लिए मिसाल तो हैं हीं, मुद्दों की समझ, निरंतर प्रयासों और सियासी संबंधों से राज्य और राज्य के लोगों के विकास के लिए किस तरह से काम हो सकते हैं, उनकी शख्सियत इसकी नजीर बनी है। उन्होंने विकास से संबंधित जो भी घोषणाएं कीं, उन्हें जमीन पर उतारा।
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. महेश कुड़ियाल कहते हैं कि बलूनी ने सांसद चुने जाने के दिन से ही लीक से हटकर फैसले लेने आरंभ कर दिए। ये बलूनी ही हैं, जिन्होंने सांसद बनने के बाद कार्यकर्ताओं को होर्डिंग, पोस्टर, अभिनंदन और स्वागत समारोह करने से साफ मना कर दिया।
पहला वेतन उन्होंने राजकीय अनाथालय के बच्चों के कल्याण के लिए दान कर दिया। सांसद निधि का इस्तेमाल नाली खड़ंजों पर खर्च करने की परंपरा को तोड़ा और इसका इस्तेमाल बड़े कार्यों पर करने की एक नई रिवायत शुरू की।
11 महीने में किए ये 12 काम
1. नैनी दून एक्सप्रेस का संचालन
2. राज्य को एनडीआरएफ की पृथक बटालियन का आवंटन
3. कोटद्वार और उत्तरकाशी चिकित्सालयों में आईसीयू की स्थापना
4. पौड़ी के बौर गांव को गोद लिया
5. सेना और अर्द्धसेना के अस्पतालों में आम जनता का उपचार
6. आईटीबीपी के अस्पतालों में उपचार प्रारंभ कराया
7 विशिष्ट बीटीसी शिक्षकों की पैरवी, समाधान अंतिम चरण में पहुंचाया
8 मसूरी पेयजल योजना के लिए 187 करोड़ स्वीकृत कराए
9. तीलू रौतेली व माधो सिंह भंडारी के स्मारकों को पुरातत्व विभाग से संरक्षित करवाना
10. टनकपुर-बागेश्वर से गैरसैंण-कर्णप्रयाग रेललाइन के सर्वे के लिए धन स्वीकृत कराना
11. रामनगर में आधुनिक बस पोर्ट की स्थापना
12. राज्य के लिए पृथक दूरदर्शन चैनल प्रारंभ करवाना