भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने राज्यसभा के चुनाव में पार्टी के पूर्व संगठन महामंत्री नरेश बंसल को उम्मीदवार बनाकर जहां संगठन को महत्व दिया तो वहीं पहाड़ और मैदान में भी संतुलन साधा है। बंसल मैदान से हैं और वैश्य समाज से ताल्लुक रखते हैं। उन्हें सम्मान देकर पार्टी ने वैश्य समाज के साथ मैदान को भी तरजीह दी है।
लोकसभा और राज्यसभा में वर्तमान में भाजपा को जो चेहरे उत्तराखंड प्रतिनिधित्व करते हैं, सभी का संबंध पहाड़ से है। लोकसभा में हरिद्वार से डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, टिहरी से महारानी राज्यलक्ष्मी, अल्मोड़ा से अजय टम्टा, नैनीताल से अजय भट्ट और गढ़वाल से तीरथ सिंह रावत, इन सभी की जड़ें पहाड़ में हैं।
इसी तरह राज्यसभा में अनिल बलूनी राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे भी पहाड़ से ही ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में भाजपा ने मैदान से नरेश बंसल को उम्मीदवार बनाकर संतुलन साधने का प्रयास किया। साथ ही पार्टी की लंबे समय से सेवा करने का इनाम भी दिया।
राज्यसभा का उम्मीदवार बनाए जाने से मैं पार्टी नेतृत्व का आभारी हूं। यह वरिष्ठ जनों और पार्टी कार्यकर्ताओं की सद्भावना से संभव हुआ।
- नरेश बंसल, राज्य सभा प्रत्याशी
मैं नरेश बंसल को शुभकामनाएं देता हूं। वह पार्टी के बहुत अच्छे और पुराने कार्यकर्ता हैं। वह जमीन से जुड़े नेता हैं। उन्हें उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी के आम कार्यकर्ता का भी सम्मान बढ़ा है।
- बंशीधर भगत, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
नरेश बंसल को मेरी ओर से बधाई। पार्टी ने बहुत वरिष्ठ कार्यकर्ता को स्थान दिया। वह लंबे समय से पार्टी की सेवा कर रहे हैं। उनके राज्यसभा में जाने से पार्टी को ताकत मिलेगी।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री
राज्यसभा चुनाव के तहत सोमवार को विधानसभा से नामांकन के पहले दिन एक भी नामांकन प्रपत्र नहीं लिया गया। मात्र एक मतदाता सूची ली गई। मंगलवार को नामांकन का आखिरी दिन है।
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य राजबब्बर की सीट 25 नवंबर को खाली हो रही है और इस कारण प्रदेश में एक सीट के लिए चुनाव भी हो रहा है। सोमवार को नामांकन का पहला दिन था लेकिन एक भी नामांकन नहीं कराया गया।
दूसरी ओर , कांग्रेस इस चुनाव में पार्टी के विधायकों की संख्या को देखते हुए पहले ही किनारा कर चुकी है। हालांकि पार्टी ने अभी यह तय नहीं किया है कि उसके विधायक वोट करेंगे या नहीं। मात्र एक नाम आने पर निर्वाचन निर्विरोध होगा।