केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा पर चीन की गतिविधि को चिंता का विषय बताया। उन्होंने सीमा पर भारतीय संस्कृति केंद्र और एफएम रेडियो शुरू करने की जरूरत बताई।
कहा कि आर्थिक आतंकवाद रोकने में एसएसबी सक्षम है। भारत में धार्मिक सहिष्णुता पर गांधी के सदमे में डूबने के ओबामा एक दिन पूर्व के बयान पर उन्होंने कहा कि भारत विश्व में अकेला देश है जहां धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं हैं।
बृहस्पतिवार को एसएसबी के सहायक सेनानायकों के दीक्षांत समारोह में शिरकत करने पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कि कदम से कदम मिलाना सीख लिया तो बहुत कुछ सीख लिया। पांच दशकों में एसएसबी ने शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं।
नेपाल और भूटान भारत के मित्र राष्ट्र हैं। दोनों देशों के साथ हमारी सीमाएं खुली हुई हैं। ऐसे में एसएसबी की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। उन्होंने असम में एसएसबी की भूमिका की भी प्रशंसा की। कहा कि कट्टरपंथी व भारत विरोधी कुछ ताकतों ने नेपाल और भूटान को अपना केंद्र बना लिया है।
अधिकारी की लिखी हुई कविता पढ़ी
वे भारत में जाली नोट, ड्रग्स व हथियारों की तस्करी के जरिए आर्थिक आतंकवाद फैला रहे हैं। इसे रोकने में एसएसबी पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्र में एफएम रेडियो शुरू होने से देश के प्रतिनिधि इन लोगों तक अपनी बात पहुंचा सकते हैं। बाद में पत्रकार वार्ता में गृहमंत्री ने कहा कि सेना में महिलाओं को 15 फीसदी प्रतिनिधित्व दिया जाएगा।
गर्व करें इस वर्दी पर, सब पर यह रंग नहीं खिलता.... गृहमंत्री ने एसएसबी अकादमी की पत्रिका अलकनंदा पर अधिकारी दुर्गा प्रसाद की लिखी कविता वरदान पढ़ कर सुनाई।
केंद्रीय गृहमंत्री से शिष्टाचार भेंट की
जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर शुक्रवार सुबह करीब 10.30 बजे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह विशेष विमान से पहुंचे। यहां से हेलीकाप्टर से श्रीनगर कार्यक्रम में भाग लेने के लिए रवाना हुए। श्रीनगर से हरिद्वार गए और वहां से लौटकर शाम 5.30 बजे दिल्ली के लिए उड़ान भरी। इस मौके पर हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल निशंक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत, पूर्व राष्ट्रीय सचिव त्रिवेंद्र सिंह रावत, ज्ञान सिंह, उर्बादत्त भट्ट, नरेश बंसल, अमित शाह आदि नेताओं ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से शिष्टाचार भेंट की।
गृहमंत्री के आगमन पर झुग्गी वाले बेघर
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के शहर में आने की सूचना पर प्रशासन ने तीन दिन पहले से ही झुग्गी वालो को बेघर कर दिया। झुग्गी वाले तीन दिन से खुले आसमान में सोने को मजबूर है। लेकिन प्रशासन को इसकी चिंता होने के बजाय गृहमंत्री इन्हें देख ले इसकी चिंता सताती रही। यह भी इस लोकतांत्रिक का एक पहलू है।
झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली लौवेश देवी ने बताया कि उसका 2 माह का बच्चा है। वह बच्चें के साथ तीन दिन से खुले में सौ रही है। जिस कारण उनके बच्चें की तबियत बहुत खराब हो गई है। जितेंद्र व राकेश कुमार का कहना है कि उनकी रोजी रोटी लोहारी का काम करके चलती है। लेकिन प्रशासन ने तीन दिन पहले ही हमें उठा दिया। जिससे हमारा काम बिल्कुल बंद हो गया है। अब हमें खाने के लाले पड़ गए है।
बुजुर्ग सोहन लाल बताते है कि मैं यहां 40 साल से रहता हूँ। इससे पहले प्रशासन का ऐसा व्यवहार कभी नहीं देखा। धौला देवी अपना वोटर आईडी कार्ड दिखाते हुए बताती है कि सरकार को जब वोट की जरुरत होती है तो हमको रोज पूछा जाता है। इससे पहले कभी सरकार ने ऐसा नहीं किया। यह इसी साल से शुरु हुआ। मेले के समय भी हमें इसी तरह बेघर कर दिया गया था। हम भूखे रहते है या खुले में सोते है इससे प्रशासन को कोई फर्क नहीं पड़ता है।