राजू का तो काम ही था खुशियां बांटना। जिससे भी मिलता उसे हंसाता ही रहता था। अब वह चला गया है तो हमें कौन हंसाएगा? यह सवाल पूछ रही थीं शहीद ले. कर्नल राजेश गुलाटी की बुआ गुरबचन दुग्गल। बार-बार राजेश की तस्वीर को हाथ में लेकर उनकी आंखों से आंसू फूटते रहे।
जम्मू-कश्मीर के बांडीपोरा में बुधवार को ध्रुव हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से राजेश और उनके सह पायलट मेजर ताहिर हुसैन की मृत्यु हो गई थी। गुलाटी को श्रद्धांजलि देने बड़ी संख्या में लोग उनके आवास पर पहुंचे। उनके छोटे भाई और अन्य परिजन बुधवार रात ही दिल्ली रवाना हो गए थे। वहीं शहीद का अंतिम संस्कार होगा। शहीद की पत्नी सारिका गुलाटी और बेटा सक्षम वहीं रहते हैं।
गुरुवार को अमर उजाला से बातचीत में बुआ गुरबचन ने कहा कि राजेश भले सेना में बड़ा अधिकारी था, लेकिन उनके लिए वह हमेशा राजू ही बना रहा। छोटे भाई मनोज की पत्नी यशिका ने बताया कि उन्होंने हमेशा उन्हें पिता जैसा स्नेह दिया। फूफा एसके दुग्गल ने बताया कि पिता केएल गुलाटी अपने बड़े बेटे यानी राजेश को सेना में भेजना चाहते थे। राजेश ने सेंट जोजेफ्स एकेडमी से 12वीं के बाद सेना की राह चुनी।
राजेश का घर प्रेमनगर के विंग नंबर पांच में है। सुबह जानकारी मिलते ही परिचितों, रिश्तेदारों और शहीद के दोस्तों के घर आने का सिलसिला शुरू हो गया था। सभी शहीद को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि देते रहे। यशिका ने बताया कि वे हर दिन उड़ान के बाद घर फोन कर हाल पूछते थे।
बुधवार शाम साढ़े सात बजे उन्होंने उड़ान भरी थी। उनके फोन का इंतजार था। रात को फोन आया, लेकिन उनकी मौत का। कैंट विधायक हरबंस कपूर ने शोक जताते हुए परिवार के प्रति भी संवेदनाएं जताईं।
अंत्येष्टि के लिए दिल्ली रवाना हुए परिजन
जम्मू-कश्मीर के बांडीपोरा में ध्रुव हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से शहीद हुए दून निवासी पायलट ले. कर्नल राजेश गुलाटी को श्रद्धांजलि देने बड़ी संख्या में लोग प्रेमनगर देहरादून स्थित उनके आवास पर पहुंचे।
शहीद के छोटे र्भाई मनोज की पत्नी यशिका ने बताया कि बुधवार रात 10:30 बजे फोन पर ले. कर्नल राजेश गुलाटी के शहीद होने की सूचना मिली थी। इसके तुरंत बाद मनोज और अन्य परिजन दिल्ली रवाना हो गए। शहीद की पत्नी सारिका गुलाटी और बेटा सक्षम वहीं रहते हैं।
सेना के हेलीकाप्टर दुर्घटना की जांच शुरू
बांडीपोरा जिले के लमान जंगल में दुर्घटनाग्रस्त सेना के हेलीकॉप्टर ध्रुव मामले की सेना ने वीरवार को जांच शुरू कर दी। सेना के इलेक्ट्रिकल मेकेनिकल इंजीनियर्स (ईएमई) और एविएशन विंग की टीम ने मौके पर जाकर दुर्घटना के कारणों का पता लगाने की कोशिश की।
ज्ञात हो कि बुधवार शाम रात्रिकालीन प्रशिक्षण उड़ान पर निकले ध्रुव हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने से पायलट लेफ्टीनेंट कर्नल राज गुलाटी और सह पायलट मेजर ताहिर हुसैन खान की मौत हो गई थी। साथ ही हेलीकॉप्टर की लपटों से जंगल में भी आग लग गई थी।
सैन्य सूत्रों के अनुसार ईएमई की पांच सदस्यीय एक्सपर्ट टीम ने घटनास्थल का दौरा किया और घटना स्थल से 100 मीटर की परिधि में घटना से जुड़े साक्ष्यों की गहनता से जांच-पड़ताल की। टीम ने दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के मलबे को एकत्र करने से पहले मौके की विभिन्न कोनों से वीडियोग्राफी की।
साथ ही फोटोग्राफ भी लिए। सेना के एविएशन विंग ने भी लगभग पांच घंटे तक घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। सूत्रों का कहना है कि टीम दोबारा एक सप्ताह बाद मौके का मुआयना कर सकती है।
सूत्रों ने बताया कि जिस समय हेलीकॉप्टर का मानसबल बेस से संपर्क कटा, वह लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर था। दुर्घटना के वक्त हेलीकाप्टर 1400 फीट की ऊंचाई पर रहा होगा। सूत्रों का कहना है कि खराब मौसम और कम दृश्यता के कारण पायलट को नीची उड़ान भरनी पड़ी होगी, यह भी दुर्घटना का एक कारण हो सकता है।