देहरादून के शहीद स्मारक परिसर में पेड़ पर चढ़ीं महिला आंदोलनकारी दो दिन बाद काफी मान-मनौव्वल के बाद आखिर नीचे उतर आईं।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र अग्रवाल के मुख्यमंत्री हरीश रावत तक उनकी बात पहुंचाने और मांगों पर कार्रवाई के आश्वासन के बाद उन्होंने यह कदम उठाया।
बीते बुधवार उत्तराखंड राज्य निर्माण चिह्नित आंदोलनकारी मंच से जुड़ीं भूमा रावत, सावित्री देवी और भुवनेश्वरी नेगी सरकारी नौकरियों में आंदोलनकारियों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण, समान पेंशन और पेंशन के लिए आयु सीमा 40 वर्ष करने की तीन सूत्री मांग को लेकर पेड़ पर चढ़ बैठी थीं।
बुधवार रात भी मान-मनौव्वल के बावजूद वह नीचे नहीं उतरीं। उन्होंने रजाई लेकर पेड़ पर ही रात बिताई। नीचे जाल और गद्दे लगाए गए थे। बृहस्पतिवार दिन भर अधिकारियों का इन्हें मनाने का दौर चलता रहा।
गृह सचिव विनोद शर्मा, जिलाधिकारी रविनाथ रमन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पुष्पक ज्योति मौके पर पहुंचे, लेकिन बात नहीं बनी। वह इन मांगों पर शासनादेश जारी होने तक पेड़ से उतरने से इंकार करती रहीं। इस बीच, यहां एकत्र हुए आंदोलनकारियों ने भी शुक्रवार को अर्द्धनग्न अवस्था में घंटाघर तक जुलूस निकालने का ऐलान कर दिया।
मंच के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह भंडारी और महासचिव बीरा भंडारी ने कहा कि मुख्यमंत्री से कई बार बात की जा चुकी है, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिलता है। मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।
देर रात कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र अग्रवाल आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे। उन्होंने उनसे वार्ता की। अपनी मां मालती के खुद आंदोलनकारी होने की बात कहते हुए आंदोलनकारियों के मुद्दों के प्रति गंभीरता की बात दोहराई। उनके शीघ्र मांगें मनवाने के आश्वासन पर सावित्री देवी और भुवनेश्वरी नेगी तो पेड़ से नीचे उतर आईं, लेकिन भूमा रावत अपनी जगह डटी रहीं। आखिर उन्हें भी सुरेंद्र अग्रवाल कुछ देर बाद नीचे उतरवाने में कामयाब हो सके।
मारपीट के बाद तनाव
बुधवार रात शहीद स्मारक के पास एक आंदोलनकारी से मारपीट के मामले को लेकर दिन भर तनाव बना रहा। बताया गया कि कुछ लोगों ने आंदोलनकारियों के बीच पहुंचकर वार्ता कराने की बात कही थी। इसी बात को लेकर गरमा-गरमी के बीच एक आंदोलनकारी से मारपीट कर दी गई थी।