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बेघरों को 'घर' में नहीं आता चैन

Fri, 19 Dec 2014 10:31 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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खुले आसमान के नीचे चौक-चौराहों पर ठिठुरते बेघरों को रैन बसेरा पहुंचाने में नगर निगम टीम को पसीने छूट रहे हैं।
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खुले आसमान के नीचे ही आती है नींद
गुरुवार को कनक चौक से अभियान शुरू हुआ तो बेघरों ने रैन बसेरा जाने से साफ मना कर दिया। टीम ने वजह पूछी तो बेघरों का जवाब था कि उन्हें खुले आसमान के नीचे ही नींद आती है।

हालांकि आला अफसरों के निर्देश था, लिहाजा बेघरों को जबरदस्ती रैन बसेरा पहुंचाया गया। इसके बावजूद कई रास्ते में खिसक कर पुराने ठिकानों पर जा पहुंचे। नगर निगम ने शहर में दो अस्थाई रैन बसेरे शुरू किए हैं। इनमें एक रैन बसेरा परेड ग्राउंड भाजपा महानगर कार्यालय के नजदीक, जबकि दूसरा रेसकोर्स में है।
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शुक्रवार को मुख्य नगर अधिकारी हरक सिंह रावत की अगुवाई में टीम पहले कनक चौक पर पहुंची। यहां कई बेघर परेड ग्राउंड और आसपास के चौकों पर सोए थे। टीम ने बेघरों को उठाकर रैन बसेरा चलने को कहा, तो सभी एक-एक कर खिसक  गए। टीम को लगा कि सभी रैन बसेरा चले गए।

व्यवस्था देखने एमएनए पहुंचे तो बसेरा खाली मिला। टीम वापस चौक पर भागी तो बेघर वहीं आराम फरमाते नजर आए। मुख्य नगर अधिकारी रावत ने दोबारा उन्हें रैन बसेरा भेजने को कहा तो हंगामा हो गया। टीम जैसे-तैसे कुछ बेघरों को रैन बसेरे तक पहुंच पाई।

इस बीच कई रास्ते से चंपत हो गए। यही हाल दून अस्पताल चौक पर हुआ। मुख्य नगर अधिकारी हरक सिंह रावत ने बताया कि ऐसे लोग मानने को राजी नहीं है। जबकि रैन बसेरा में बिछाने और ओढ़ने के लिए पर्याप्त कंबल और सुविधाएं हैं।

नशा है मुख्य वजह
बेघरों के रैन बसेरा न जाने की मुख्य वजह नशा है। दरअसल रैन बसेरा में नगर निगम कर्मचारी ऐसे लोगों को चरस, शराब, गांजा आदि नशीले पदार्थ नहीं पीने देते। ऐसे में महज नशे के लिए यह लोग बच्चों समेत खुले आसमान के नीचे रहने के लिए तैयार हैं।
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कुछ ही जगह जल रहे अलाव
नगर निगम के अलाव कुछ ही जगह लोगों को राहत दे रहे हैं। कुछ जगहों पर अलाव अब तक नहीं जले हैं। रेलवे स्टेशन, आईएसबीटी चौक और बल्लूपुर चौक आदि जगहों पर बेघर दुकानों के बाहर कूड़ा जला कर आग सेंक रहे हैं।
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